Cancer Cases in India: भारतीय पुरुषों में इन 4 कैंसर का खतरा ज्यादा, AIIMS डॉक्टर ने बताए प्रमुख कारण और चेतावनी संकेत
Cancer in Indian Men: भारत में कैंसर के मामले लगातार एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं। पुरुषों में कुछ खास प्रकार के कैंसर अधिक देखने को मिलते हैं, जिनमें मुंह, फेफड़े, कोलोरेक्टल और पेट का कैंसर प्रमुख हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक तंबाकू और शराब का सेवन, धूम्रपान, अस्वास्थ्यकर खानपान, मोटापा, प्रदूषण और कुछ मामलों में पारिवारिक इतिहास जैसे कारक जोखिम बढ़ा सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति में कैंसर होने का कारण केवल एक ही वजह नहीं होती और हर व्यक्ति का जोखिम अलग हो सकता है।
कैंसर के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी समय पर पहचान और उचित जांच है। शुरुआती चरण में बीमारी का पता चलने पर कई प्रकार के कैंसर का इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है। ऐसे में पुरुषों को शरीर में लंबे समय तक बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है।
भारतीय पुरुषों में किन कैंसर का खतरा ज्यादा?
विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय पुरुषों में मुंह का कैंसर प्रमुख कैंसर में शामिल है। इसके अलावा फेफड़ों, कोलोरेक्टल यानी बड़ी आंत और पेट के कैंसर के मामले भी चिंता का विषय हैं। मुंह के कैंसर का जोखिम खासतौर पर तंबाकू, गुटखा, पान-मसाला, सुपारी और धूम्रपान जैसी आदतों से बढ़ सकता है। वहीं फेफड़ों के कैंसर के मामले में धूम्रपान के साथ लंबे समय तक वायु प्रदूषण और पैसिव स्मोकिंग का संपर्क भी जोखिम को प्रभावित कर सकता है।
क्यों बढ़ रहा है कैंसर का खतरा?
कैंसर के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ जोखिम कारक व्यक्ति की जीवनशैली से जुड़े होते हैं, जबकि कुछ में उम्र, आनुवंशिक कारण और पारिवारिक इतिहास की भूमिका हो सकती है।
- मुंह का कैंसर: तंबाकू, गुटखा, पान-मसाला, सुपारी और शराब जैसे कारक जोखिम बढ़ा सकते हैं।
- फेफड़ों का कैंसर: धूम्रपान इसका प्रमुख जोखिम कारक है। इसके अलावा वायु प्रदूषण और लंबे समय तक दूसरे लोगों के धुएं के संपर्क में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
- कोलोरेक्टल कैंसर: कम फाइबर वाली डाइट, ज्यादा प्रोसेस्ड मीट, शारीरिक गतिविधि की कमी और मोटापा कुछ लोगों में जोखिम बढ़ा सकते हैं। हालांकि, इन कारकों का होना कैंसर होने की गारंटी नहीं है।
- पेट का कैंसर: हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण, कुछ खानपान संबंधी आदतें, धूम्रपान और पारिवारिक इतिहास जैसे कारक जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
किन पुरुषों को अधिक सावधान रहने की जरूरत?
उम्र बढ़ने के साथ कई कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा तंबाकू या शराब का सेवन, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान, पारिवारिक इतिहास और लंबे समय तक कुछ पर्यावरणीय जोखिमों के संपर्क में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि इन जोखिम कारकों वाले हर व्यक्ति को कैंसर होगा। लेकिन ऐसे लोगों के लिए अपनी जीवनशैली सुधारना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से स्क्रीनिंग या जांच के बारे में सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
कुछ लक्षण कई सामान्य बीमारियों में भी हो सकते हैं, लेकिन अगर वे लंबे समय तक बने रहें या लगातार बढ़ते जाएं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
- मुंह में ऐसा घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो
- आवाज में लगातार बदलाव या भारीपन
- लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी
- निगलने में परेशानी
- मल में खून आना
- bowel habits में लगातार बदलाव
- बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना
- लगातार पेट दर्द या अपच
- शरीर में लंबे समय तक बनी रहने वाली असामान्य गांठ
कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?
कैंसर के हर मामले को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन कई जोखिम कारकों को कम किया जा सकता है। इसके लिए तंबाकू और गुटखा छोड़ना, धूम्रपान से दूरी बनाना, शराब का सेवन सीमित या बंद करना, वजन को स्वस्थ सीमा में रखना और नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवनशैली का हिस्सा बनाना महत्वपूर्ण है। खानपान में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त फाइबर को शामिल करें तथा अत्यधिक प्रोसेस्ड और अस्वास्थ्यकर भोजन से बचें। परिवार में कैंसर का इतिहास है या कोई लगातार असामान्य लक्षण दिखाई दे रहा है, तो डॉक्टर से समय पर सलाह लेना बेहतर है।
जरूरी बात: कैंसर से जुड़े किसी भी लक्षण को देखकर खुद से निष्कर्ष न निकालें। सही बीमारी का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
