आबकारी विभाग में डबल अटैक: शराब घोटाले के गवाह इंस्पेक्टरों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा, उधर बैगा आदिवासियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
रायपुर/कबीरधाम। छत्तीसगढ़ का आबकारी विभाग इन दिनों बड़े संकट से गुजर रहा है। एक तरफ शराब दुकानों में ओवर रेटिंग (तय कीमत से अधिक वसूली) के मामले में हुई निलंबन की कार्रवाई ने विभाग के भीतर ही बगावत की आग भड़का दी है। वहीं, दूसरी तरफ कबीरधाम जिले में बैगा आदिवासियों ने आबकारी अधिकारियों पर फर्जी मुकदमों और कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाने का गंभीर आरोप लगाते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। सरकार अब दोहरे दबाव में है—एक ओर अपने ही बागी अफसर हैं, तो दूसरी ओर आक्रोशित आदिवासी समाज।
शराब घोटाले के गवाह ही बने सरकार के लिए नासूर
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ी बात यह है कि जिन इंस्पेक्टरों ने पिछले शराब घोटाले की जांच में सरकार को सहयोग किया था l जो अहम गवाह हैं, वही अब सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं। आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा द्वारा 4 अधिकारियों को सस्पेंड और 8 को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद, सब-इंस्पेक्टरों ने बिना शासन की अनुमति के अपना संघ बना लिया है। आज इन बागी इंस्पेक्टरों ने बिना विभागीय अनुमति के रायपुर स्थित जीएसटी भवन पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया और मांगें पूरी न होने पर कल से नियमित हड़ताल की चेतावनी दे दी है।
व्हाट्सऐप चैट से फूटा बगावत का बम
ओवर रेटिंग मामले में हुई कार्रवाई के बाद आबकारी अधिकारी-कर्मचारी संघ की एक व्हाट्सऐप चैट वायरल हुई है। इस चैट में साफ़ लिखा गया है कि यही समय संगठन की ताकत दिखाने का है।
प्रदेश भर में चिल्लर नहीं है या बोतल ठंडी है का बहाना बनाकर 10 से 60 रुपए तक ज्यादा वसूले जा रहे थे। ऑनलाइन पेमेंट से बचने के लिए यूपीआई स्कैनर खराब होने के बोर्ड तक लगा दिए गए। इधर संघ का कहना है कि जब अधिकारियों को केवल निगरानी का जिम्मा दिया गया है, तो दुकानों की हर गड़बड़ी का ठीकरा उनके सिर क्यों फोड़ा जा रहा है?
राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र बैगा आदिवासियों ने दिया अल्टीमेटम: कहा कोरे कागज पर दस्तखत और कर रहे फर्जी एफ़आईआर ..

राजधानी में इंस्पेक्टर अपनी बहाली के लिए बगावत कर रहे हैं, वहीं कबीरधाम में इन्ही इंस्पेक्टरों पर भ्रष्टाचार और आदिवासी उत्पीड़न के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के जिलाध्यक्ष कामू बैगा के नेतृत्व में समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आबकारी विभाग के एसआई अभिनव रायजादा और रीता साहू (गीता) पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि भोले-भाले बैगा आदिवासियों (समरत, शहरु, परसादी बैगा आदि) को डरा-धमका कर एसआई कोरे कागजों पर बलपूर्वक हस्ताक्षर करवा कर उन्हें झूठे मामले में फंसा रहे है l
उन्होंने कहा कि यदि इन भ्रष्ट अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर इन पर आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया, तो शांतिप्रिय बैगा समाज सड़कों पर उग्र आंदोलन करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
सरकार के सामने खड़ी हुई दोहरी चुनौती
वर्तमान स्थिति ने शासन की नींद उड़ा दी है। एक ओर शराब घोटाले के राजदार इंस्पेक्टरों का यह बागी रुख सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है, वहीं बैगा जैसे संरक्षित जनजाति का आक्रोश राजनीतिक रूप से बड़ा डैमेज कर सकता है।
