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बेटे के कान का पर्दा फटा और पुलिस ने उसी पर दर्ज कर दी एफआईआर, बेबस तहसीलदार पिता की नहीं चली
सारंगढ़। जिले में सुशासन का सूरज ऐसा चमका है कि अब न्याय मांगना भी गुनाह लगने लगा है। तहसीलदार बंदे राम भगत अपने बेटे राहुल के कान का फटा पर्दा लेकर पुलिस के पास इंसाफ मांगने गए थे, लेकिन खाकी ने उल्टा उनके बेटे को ही मुजरिम बना दिया। भारत माता चौक पर 20 जनवरी की दोपहर कलेक्टर के गनमैन के साथ हुए विवाद में पुलिस ने गनमैन की शिकायत पर तहसीलदार के बेटे के खिलाफ ही संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। एक पिता अपने घायल बेटे के लिए थाने के सामने भूखा-प्यासा बैठा रहा, लेकिन प्रशासन का दिल नहीं पसीजा और अंत में लाचार पिता की ममता पर गनमैन की वर्दी भारी पड़ गई।
गनमैन का रसूख और वर्दी की धौंस, न्याय के लिए तरसते रहे पिता
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कलेक्टर के गनमैन हरिशचंद्र चंद्रा ने राहुल पर आरोप लगाया कि उसने शासकीय वाहन के सामने स्कूटी अड़ाई और गाली-गलौज की। गनमैन का दावा है कि राहुल ने उसकी वर्दी का कॉलर पकड़कर बटन तोड़ दिए और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने गनमैन की बात को पत्थर की लकीर मानते हुए राहुल पर बीएनएस की धारा 121(1), 132, 296 और 351(2) के तहत केस दर्ज कर लिया है। वहीं तहसीलदार पिता चिल्लाते रहे कि गनमैन की पिटाई से उनके बेटे के कान का पर्दा फट गया है, पर पुलिस ने उनकी एक न सुनी। साहब का सुरक्षाकर्मी होने के नाते पुलिस ने उसे क्लीन चिट दे दी और प्रार्थी को ही आरोपी बना दिया।
अनशन पर बैठे बेबस पिता, पर सिस्टम ने दिखाई बेरुखी
अपने कलेजे के टुकड़े को दर्द में देख तहसीलदार बंदे राम भगत सिटी कोतवाली के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए थे। एक जिम्मेदार अधिकारी होने के नाते उन्हें उम्मीद थी कि कानून सबके लिए बराबर होगा, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। पिता ने करीब 8 बार टीआई को फोन किया, लेकिन साहब ने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। जब फाइल आगे बढ़ी तो पता चला कि वह न्याय की नहीं बल्कि उनके बेटे को जेल भेजने की तैयारी थी। एक पिता की बेबसी का आलम यह था कि वे थाने की चौखट पर न्याय की भीख मांगते रहे और सिस्टम फाइलों को गुमराह करता रहा।
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इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। जब जिले के एक तहसीलदार को अपने बेटे के लिए थाने के सामने गिड़गिड़ाना पड़ रहा है, तो आम आदमी की बिसात ही क्या है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है और पूछा है कि क्या अब कलेक्टर के करीबियों को कानून से ऊपर मान लिया गया है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है, लेकिन इस कार्रवाई ने सुशासन के दावों की हवा निकाल दी है।
डिस्क्लेमर: यह खबर प्रार्थी, तहसीलदार पिता के बयानों और पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर लिखी गई है। मामले की सच्चाई और मारपीट के दावों की अंतिम पुष्टि अदालती कार्रवाई और मेडिकल जांच के बाद ही होगी।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
