कोर्ट परिसर को अखाड़ा बनाने वालों को झटका: हाई कोर्ट ने कहा कानून हाथ में लेना बर्दाश्त नहीं

कोर्ट परिसर को अखाड़ा बनाने वालों को झटका: हाई कोर्ट ने कहा कानून हाथ में लेना बर्दाश्त नहीं

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कोर्ट परिसर के भीतर हंगामा करने और पुलिस के काम में अड़ंगा डालने वाले आरोपियों को तगड़ा झटका दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने दो आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कोर्ट जैसी पवित्र जगह को विरोध प्रदर्शन का अखाड़ा नहीं बनाया जा सकता। मामला तखतपुर पुलिस द्वारा एक कथावाचक को पेशी पर लाने के दौरान हुए विवाद से जुड़ा है जहां भीड़ ने कोर्ट रूम तक घुसकर धमकियां दी थीं।

अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी व्यक्ति या समूह को विरोध के नाम पर कानून हाथ में लेने की आजादी नहीं दी जा सकती। मामला 15 नवंबर 2025 का है जब तखतपुर पुलिस कथावाचक आशुतोष चैतन्य को लेकर कोर्ट पहुंची थी। वहां मौजूद संजीव कुमार बर्मन और अमृत दास डहरिया ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिस का रास्ता रोक लिया और जमकर नारेबाजी की।

 

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कोर्ट रूम में घुसकर दी थी जान से मारने की धमकी

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पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक हंगामा सिर्फ बाहर ही नहीं हुआ बल्कि आरोपी जबरन कोर्ट रूम के भीतर तक घुस गए थे। वहां उन्होंने न केवल अदालती कार्यवाही में बाधा डाली बल्कि कथावाचक को जान से मारने की धमकी भी दी। इस अराजकता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। गिरफ्तारी के डर से संजीव और अमृत ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली।

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तटस्थ जगह पर गुंडागर्दी मंजूर नहीं

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने साफ किया कि कोर्ट परिसर एक तटस्थ और शांतिपूर्ण स्थान होता है। यहां की गरिमा बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से पुलिस को अपना काम करने से रोका गया और न्यायिक प्रक्रिया में खलल डाला गया वह बेहद चिंताजनक है। ऐसे मामलों में नरमी बरतने से समाज में गलत संदेश जाता है।

पुलिस के काम में बाधा डालना पड़ा महंगा

पुलिस सूत्रों ने बताया कि उस दिन कोर्ट परिसर में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। भीड़ ने कथावाचक को घेरने की कोशिश की थी और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई थी। इस फैसले के बाद अब पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी की तैयारी में जुट गई है। कानूनी जानकारों का कहना है कि हाई कोर्ट की इस सख्ती से भविष्य में कोर्ट परिसर में उपद्रव करने वालों को कड़ा सबक मिलेगा।

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