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पहली बारिश में 4 करोड़ का एनीकट बहाने वाले अफसर को 5000 करोड़ का बजट सौंपने की तैयारी जल संसाधन विभाग में दागी अफसरों का दबदबा मक्सी कुजूर की कुर्सी हथियाने के जुगाड़ में आलोक अग्रवाल
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग में इन दिनों ईमानदारी और काम की नहीं बल्कि जुगाड़ और दागदार इतिहास की पूछपरख ज्यादा है। जो अफसर करोड़ों के प्रोजेक्ट पानी में बहा चुके हैं वे अब प्रमोशन की मलाई खाने की तैयारी में हैं। विभाग के प्रमुख अभियंता यानी ईएनसी पद के लिए ऐसे नामों की पैरवी चल रही है जिनका अतीत घोटालों से भरा पड़ा है। सबसे चौंकाने वाला नाम महानदी परियोजना के मुख्य अभियंता शंकर ठाकुर का है जिन पर दंतेवाड़ा में पोस्टिंग के दौरान करोड़ों के एनीकट घोटाले का सीधा आरोप है। दूसरी तरफ बिलासपुर में अरपा नदी के किनारे भ्रष्टाचार की दीवार खड़ी करने वाले आलोक अग्रवाल अब तबादला उद्योग चलाने के साथ ही मक्सी कुजूर की जगह लेने के पूरे जुगाड़ में हैं। यह सब विष्णु देव साय सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को मुंह चिढ़ाने जैसा है।

शंकर ठाकुर का पुराना कारनामा किसी से छिपा नहीं है। जब वे दंतेवाड़ा में कार्यपालन अभियंता थे तब उन्होंने नियम कानूनों को ताक पर रखकर तलख कंस्ट्रक्शन अंबिकापुर को काम दिया। इसके बाद पेटी ठेकेदार अमित जायसवाल को एंट्री मिली। इन दोनों की जुगलबंदी ने कमाल का काम किया। काम ऐसा हुआ कि कागज पर सब कुछ चकाचक और जमीन पर सब कुछ गायब था। ड्राइंग और डिजाइन को कूड़ेदान में डाल दिया गया। फाउंडेशन की गहराई इतनी कम रखी गई कि पहली ही बारिश में 4 करोड़ की लागत से बना एनीकट ताश के पत्तों की तरह ढह गया और टुकड़ों में बिखर गया।
इस प्रोजेक्ट में काम सिर्फ 25 प्रतिशत हुआ वह भी पूरी तरह से गुणवत्ता विहीन। बाकी 75 प्रतिशत रकम का बंदरबांट कैसे हुआ यह पूरा सिस्टम जानता है। अब सबसे बड़ा कटाक्ष यह है कि जिस अफसर ने 4 करोड़ की योजना को पानी में मिला दिया उसे अब 5000 करोड़ के बजट वाले विभाग का मुखिया बनाने की तैयारी चल रही है। यह तो वही बात हुई कि बिल्ली को दूध की रखवाली सौंप दी जाए। अगर ऐसे अधिकारी 5000 करोड़ के बजट पर बैठेंगे तो जनता का कितना पैसा पानी में बहेगा इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
शंकर ठाकुर को लेकर कांग्रेस लॉबी पूरी तरह सक्रिय है। वे एक पूर्व आईएएस अधिकारी और कांग्रेस के सांसद प्रत्याशी के समधी हैं। इसी रिश्तेदारी और रसूख का फायदा उठाकर वे प्रमुख अभियंता की कुर्सी तक पहुंचना चाहते हैं। आम जनता और विभाग के ईमानदार अफसर हैरान हैं कि आखिर सिस्टम इन दागी अफसरों पर इतना मेहरबान क्यों है।
अब बात करते हैं विभाग के दूसरे चमकते सितारे आलोक अग्रवाल की। जल संसाधन विभाग में इन दिनों जो भी ट्रांसफर हो रहे हैं उसके पीछे आलोक अग्रवाल का ही दिमाग बताया जा रहा है। आलोक अग्रवाल का ट्रैक रिकॉर्ड इतना नेगेटिव है कि उस पर भ्रष्टाचार की एक पूरी किताब लिखी जा सकती है। बिलासपुर में रहते हुए इन्होंने अरपा रिटर्निंग वॉल और पंहदा एनीकट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में जमकर खेल किया। इनके बनाए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जगजाहिर है। करोड़ों रुपये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए और पूरी संरचना कबाड़ में तब्दील हो गई लेकिन सिस्टम खामोश रहा।
हैरानी की बात यह है कि इतना दागदार अतीत होने के बावजूद आलोक अग्रवाल आज भी पावर सेंटर बने हुए हैं। सूत्रों की मानें तो पूर्व सिंचाई मंत्री के एक ओएसडी जो आज भी मंत्रालय में जमे हुए हैं उनका पूरा आशीर्वाद आलोक को मिला हुआ है। इसी ओएसडी की बैसाखी के सहारे आलोक अग्रवाल अब मंत्रालय में तगड़ी पकड़ बना चुके हैं और अपना स्वार्थ साध रहे हैं।
कल तक प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम थी कि मक्सी कुजूर को विभाग का नया ईएनसी बनाया जा सकता है। लेकिन रातों रात खेल हुआ और उन्हें महानदी परियोजना में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बनाकर किनारे कर दिया गया। अब अंदरखाने से जो सबसे बड़ी खबर निकलकर आ रही है वह यह है कि मक्सी कुजूर की जगह लेने के लिए आलोक अग्रवाल पूरी तरह से जुगाड़ में लग गए हैं। तबादलों के इस खेल में आलोक अग्रवाल खुद को उसी अहम कुर्सी पर सेट करने की जुगत भिड़ा रहे हैं ताकि मलाईदार पोस्टिंग का पूरा फायदा उठाया जा सके। जो अफसर खुद भ्रष्टाचार के दलदल में डूबा हो वह दूसरों का पत्ता काटकर अपनी जगह पक्की कर रहा है।
यह सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन का दावा करते हैं लेकिन उनके ही राज में ऐसे अफसरों को मलाईदार पोस्टिंग मिलना उनकी छवि को भी सीधा नुकसान पहुंचा रहा है। आम जनता के खून पसीने की कमाई को इस तरह ठेकेदारों और अफसरों की मिलीभगत से बर्बाद होते देखना बेहद निराशाजनक है। अब विभागीय स्तर पर और आम जनता के बीच से यह मांग तेजी से उठ रही है कि ऐसे दागी अफसरों को किसी भी हाल में प्रमुख पदों पर न बैठाया जाए। इनके पुराने कारनामों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही तय हो सके।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
