IAS साहब का पावर गेम : सरगुजा में जनसंपर्क अफसरों से की थी गाली-गलौज, अब मुंगेली में थानेदारों से मांग रहे 'नो अफीम' का NOC, डांट से रो पड़ीं महिला अफसर

मुंगेली। छत्तीसगढ़ में अफसरशाही के भी अपने ही अलग रंग हैं। यहां कुछ अफसरों के सिर पर 'पावर का नशा' ऐसा चढ़ता है कि उतरने का नाम ही नहीं लेता। 2014 बैच के IAS साहब का विवादों से पुराना नाता रहा है। सरगुजा में कलेक्टर रहते हुए जनसंपर्क विभाग के अफसरों को धमकाने और गरियाने वाले साहब, अब मुंगेली में अपनी अलग ही तानाशाही चला रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि उनकी फटकार से एक महिला अफसर मीटिंग में ही फूट-फूट कर रो पड़ीं। 

पहले जानिए सरगुजा का वो पुराना पीआरओ विवाद

बात अगस्त 2022 की है। साहब तब सरगुजा (अंबिकापुर) के कलेक्टर हुआ करते थे। वहां उनका रवैया इतना सख्त था कि जनसंपर्क (PR) विभाग के कर्मचारी रोज दहशत में दफ्तर जाते थे। साहब पर आरोप लगा था कि वे छोटी-छोटी बातों पर मातहतों को भद्दी गालियां देते हैं और नौकरी खाने की धमकी देते हैं। 

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उस समय सहायक सूचना अधिकारी दार्शन सिंह सिदार और सहायक संचालक सुखसागर वारे के साथ हुई उनकी अभद्रता ने खूब बवाल काटा था। साहब की मनमानी ऐसी थी कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर एक पीआरओ को सीधे एसडीओ ऑफिस में शिफ्ट कर दिया। तंग आकर जनसंपर्क अधिकारी संघ ने बगावत कर दी। कलेक्टर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास कर दिया गया और तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से शिकायत कर दी गई कि साहब से हमें बचाइए। 

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अब मुंगेली में साहब का नया फरमान

विवाद बढ़ा तो सरकार ने उन्हें वहां से हटा दिया। हाउसिंग बोर्ड और नगरीय प्रशासन से होते हुए साहब मुंगेली जिले में आ गए। लेकिन, जगह बदलने से साहब का मिजाज जरा भी नहीं बदला। अब मुंगेली में उनके एक नए फरमान ने पूरे पुलिस महकमे का माथा ठनका दिया है। 

दरअसल, पिछले 20 दिनों में रायगढ़, दुर्ग और बलरामपुर में अवैध अफीम की खेती पकड़ी गई है। करोड़ों का माल मिला है। विपक्ष के प्रेशर में सरकार फुल टेंशन में है और ऊपर से सख्त आदेश है कि सूबे में कहीं भी अफीम नहीं उगनी चाहिए। मुंगेली के IAS साहब ने इस आदेश को अपनी तानाशाही का नया टूल बना लिया है। 

थानेदार मुजरिम पकड़ें या खेतों में अफीम सूंघें?

साहब अब ग्रामीण इलाकों के एसडीओपी (SDOP) और शहरी थानों के टीआई (TI) से लिखित में 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) मांग रहे हैं। साहब का साफ कहना है- 'लिखकर दो कि तुम्हारे थाना क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अफीम की खेती नहीं हो रही है।' 

पुलिसवाले परेशान हैं कि उनका काम लॉ एंड ऑर्डर संभालना है या कृषि विस्तार अधिकारी बनकर खेतों में फसलें चेक करना? पुलिसवाले दबी जुबान में कह रहे हैं कि साहब चाहते हैं हम अपराधियों की बंदूकें छोड़ें और खेतों में जाकर अफीम के फूल सूंघें।

मीटिंग में महिला अफसर को रुलाया

हद तो तब हो गई जब अफीम के इसी मामले पर साहब ने एक मीटिंग बुलाई। इस दौरान उन्होंने एक डिप्टी रैंक की महिला अफसर को सबके सामने इतनी बुरी तरह से लताड़ा कि उनका मनोबल ही टूट गया और वे मीटिंग में सबके सामने रोने लगीं। वहां मौजूद बाकी अफसर बस सन्न होकर देखते रह गए। 

मामले में शोकाज नोटिस जारी 

मुंगेली में इस मामले ने तुल पकड़ लिया है और संभाग से लेकर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों में इस बात की चर्चा है। इसी बीच सूत्रों से जानकारी यह भी मिली है कि मामले में साहब को शोकाज भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। 

 

 

डिस्क्लेमर (Disclaimer):

यह समाचार विभिन्न स्रोतों, प्राप्त सूचनाओं एवं स्थानीय स्तर पर चर्चित तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें वर्णित आरोप संबंधित व्यक्तियों/अधिकारियों के विरुद्ध लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि होना शेष हो सकता है। इस समाचार का उद्देश्य केवल जानकारी देना है, किसी की छवि को ठेस पहुंचाना नहीं है।

 

 

 

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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