निगम के रिकॉर्ड में जिंदा इंसान को बना दिया मुर्दा, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से मचा हड़कंप
कोरबा : सरकारी दस्तावेजों में किसी व्यक्ति को जिंदा से मुर्दा बना देना कितना आसान है, इसका चौंकाने वाला मामला कोरबा नगर पालिक निगम की जन्म-मृत्यु शाखा से सामने आया है। यहां दो जीवित ग्रामीणों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्शाकर उनके नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करा दिए गए। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों की मौत का प्रमाण पत्र जारी हुआ, वे आज भी जीवित हैं। पीड़ितों को अपने सरकारी कामकाज के दौरान इस फर्जीवाड़े का पता चला। मामला सामने आने के बाद निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया है। निगम की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
1997 में मौत बताकर 2003 में जारी कराया प्रमाण पत्र
सिविल लाइन थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसमंदा निवासी भोला राम और रामरतन के नाम से 5 सितंबर 2003 को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराए गए थे। दस्तावेजों में भोला राम की मृत्यु 12 जून 1997 और रामरतन की मृत्यु 2 मई 1997 दर्शाई गई थी। कागजों में दोनों की जिंदगी खत्म हो चुकी थी, जबकि हकीकत में दोनों ग्रामीण जीवित थे।
सरकारी काम अटके तो खुला फर्जीवाड़े का राज
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब भोला राम और रामरतन के सरकारी कामकाज में अड़चनें आने लगीं। अपने नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने की जानकारी मिलने पर दोनों ग्रामीणों ने इसकी पतासाजी शुरू की। जांच-पड़ताल में पता चला कि उनके नाम से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र कोरबा नगर निगम से बनाए गए थे। इसके बाद वे निगम कार्यालय पहुंचे और दस्तावेजों की जानकारी ली।
तहसील में रिकॉर्ड नहीं, फर्जी दस्तावेजों के सहारे जारी हुए प्रमाण पत्र
नगर निगम की ओर से बताया गया कि प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी की गई थी। लेकिन जब तहसील स्तर पर संबंधित रिकॉर्ड की तलाश की गई तो वहां कोई अभिलेख नहीं मिला। इसके बाद फर्जी दस्तावेज, कूटरचित ज्ञापन और बैंक चालान के जरिए मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल किए जाने की आशंका सामने आई। पूरे मामले ने प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन पर भी संदेह होने लगा हैं।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसे मामले
नगर निगम की जन्म-मृत्यु शाखा पहले भी इसी तरह के विवाद में घिर चुकी है। शहर के एक प्रभावशाली व्यक्ति की जीवित बहू का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए जाने का मामला भी सामने आया था।
दो आरोपियों पर एफआईआर, पुलिस जांच में जुटी
नगर निगम की शिकायत के आधार पर पुलिस ने रामशरण और अनिल कुमार के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, इसमें और कौन-कौन शामिल थे तथा इस फर्जीवाड़े का मकसद क्या था। जांच के बाद ही पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
