शिक्षा मंत्री के गृह जिले में परीक्षा के बीच मौत बनकर गिरी छत, खतरे में पड़ी 50 बच्चों की जान, तीन घायल
दुर्ग : सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल के दावों के बीच दुर्ग जिले से व्यवस्था की पोल खोलने वाली बड़ी घटना सामने आई है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के गृह जिले के गनियारी स्थित शासकीय हाई स्कूल में परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों पर अचानक छत का प्लास्टर भरभराकर गिर पड़ा। हादसे में तीन विद्यार्थी घायल हो गए। इनमें एक छात्रा के सिर पर गंभीर चोट आई है। घटना के वक्त कक्षा में करीब 50 विद्यार्थी परीक्षा दे रहे थे। अचानक हुए इस हादसे से स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों में दहशत फैल गई।
संस्कृत की परीक्षा चल रही थी, तभी भरभराकर गिरा प्लास्टर

जानकारी के अनुसार, गनियारी स्थित शासकीय हाई स्कूल में कक्षा 10वीं की संस्कृत की परीक्षा चल रही थी। विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में सवालों के जवाब लिखने में जुटे थे। इसी दौरान अचानक छत का प्लास्टर टूटकर नीचे गिर पड़ा। मलबे की चपेट में आने से तीन विद्यार्थी घायल हो गए। हादसे के बाद परीक्षा कक्ष में चीख-पुकार मच गई। शिक्षकों ने तत्काल घायल बच्चों को संभाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। घायल विद्यार्थियों को जिला अस्पताल दुर्ग ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। इनमें एक छात्रा के सिर पर गंभीर चोट आई है। घटना के बाद से परीक्षा दे रहे अन्य विद्यार्थियों में भी डर का माहौल है।
25-30 साल पुराने भवन में चल रही हाई स्कूल की कक्षाएं
गनियारी का यह स्कूल लंबे समय से पुराने भवन में संचालित हो रहा है। बताया जा रहा है कि स्कूल भवन करीब 25 से 30 साल पुराना है। हाई स्कूल के रूप में उन्नयन होने के बाद भी विद्यार्थियों को नए भवन की सुविधा नहीं मिल सकी है। फिलहाल मिडिल स्कूल के पुराने भवन में ही हाई स्कूल की कक्षाएं लग रही हैं।
दो साल से अटका नया भवन, पुराने कमरे में पढ़ने को मजबूर बच्चे
पूर्व सरपंच रोहित साहू के अनुसार, स्कूल के नए भवन के निर्माण के लिए करीब 75 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद राशि वापस चली गई। इसके बाद से दो साल से हाई स्कूल की कक्षाएं पुराने भवन में ही संचालित हो रही हैं। कक्षा नौवीं और दसवीं में करीब 100 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल के हाई स्कूल के रूप में उन्नयन के बाद नए भवन की जरूरत थी और इसके लिए राशि भी स्वीकृत की गई, लेकिन भवन निर्माण शुरू नहीं हो सका। ऐसे में विद्यार्थियों को आज भी पुराने और जर्जर भवन में ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।
डीईओ ने भेजी जांच टीम
घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच टीम को स्कूल भेजा है। डीईओ के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।
भवन जर्जर नहीं: समग्र शिक्षा के अधिकारी
वहीं, समग्र शिक्षा के डीएमसी विनोद सिंह का कहना है कि संबंधित भवन की स्थिति जर्जर जैसी नहीं थी। इसी वजह से उस कक्ष में बच्चों को बैठाकर परीक्षा ली जा रही थी। हादसे में तीन बच्चे घायल हुए हैं, जिनमें एक को जिला अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया। उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों को जर्जर भवन या कक्ष में बच्चों को नहीं बैठाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी स्कूलों में पहले भी हुए कई हादसे, लेकिन नहीं जागा प्रशासन
सरकारी स्कूलों में जर्जर भवन और छत का प्लास्टर गिरने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। गनियारी की घटना ने एक बार फिर बता दिया हैं कि आखिर विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभाग कितने गंभीर हैं। जब परीक्षा के दौरान करीब 50 विद्यार्थी एक ही कक्ष में बैठे हों और अचानक छत का मलबा गिर पड़े, तो यह केवल भवन की स्थिति का मामला नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बन जाता है। अब देखना होगा कि जांच में हादसे की वजह क्या सामने आती है और स्कूल भवन की मरम्मत या नए भवन को लेकर जिम्मेदार विभाग क्या कदम उठाते हैं।
