38 करोड़ का हरदीडीह एनीकट महानदी में बहा, अधिकारियों-ठेकेदार की साठगांठ; अब विधानसभा में उठा घोटाले का मुद्दा

38 करोड़ का हरदीडीह एनीकट महानदी में बहा, अधिकारियों-ठेकेदार की साठगांठ; अब विधानसभा में उठा घोटाले का मुद्दा

रायपुर। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में महानदी पर 38 करोड़ रुपये की लागत से बना हरदीडीह एनीकट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। निर्माण कार्य में इस कदर अनियमितता और लापरवाही बरती गई कि एनीकट का 180 मीटर से अधिक का हिस्सा महानदी में बह गया। एनीकट की जो शेष संरचना बची है, वह भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

अब इस घोटाले का मामला सोमवार को विधानसभा में उठा। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की साठगांठ से इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया, जिससे करोड़ों रुपये पानी में बह गए। प्रशासनिक स्तर पर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन जांच नहीं कराई गई। संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की साठगांठ से निर्माण एजेंसी और ठेकेदार को बचाने का प्रयास किया गया। इसी वजह से मामले की जांच आगे नहीं बढ़ सकी।

गुणवत्ता परीक्षण नहीं, नियमों की अनदेखी

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इस 38 करोड़ की परियोजना में नियमों का पालन नहीं किया गया। ध्यानाकर्षण सूचना में बताया गया है कि निर्माण कार्य के दौरान और काम पूरा होने के बाद गुणवत्ता परीक्षण के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण ही नहीं कराया गया। साथ ही, अनुबंध के अनुसार दोष दायित्व अवधि (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड) का भी पालन नहीं हुआ। विधायक का आरोप है कि यह प्रक्रिया पूरी नहीं होने से निर्माण की गुणवत्ता की सही जांच नहीं हो सकी और ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया।

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विधायक ने खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री का खींचा ध्यान

सरायपाली विधायक चातुरी नन्द ने इस मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने नियम 138(1) के तहत ध्यानाकर्षण सूचना देकर मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। उन्होंने अध्यक्ष से इसे सदन में उठाने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

विधायक ने दावा किया है कि प्रदेश में सड़क और सिंचाई योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है, लेकिन कुछ मामलों में ऐसी अनियमितता के कारण सरकार की छवि प्रभावित हो रही है। वर्ष 2012-13 में महानदी पर बने इस एनीकट के बह जाने से निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जनता में नाराजगी, सरकार के जवाब का इंतजार

ध्यानाकर्षण सूचना के अनुसार, इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र के लोगों में खासी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी महत्वपूर्ण सिंचाई संरचना के क्षतिग्रस्त होने के बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

अब विधानसभा में सरकार का जवाब आना बाकी है। ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए सरकार से यह स्पष्ट करने की अपेक्षा की गई है कि हरदीडीह एनीकट के क्षतिग्रस्त होने के कारण क्या हैं, निर्माण की गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं हुई, शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल सरकार की ओर से इस मामले पर जवाब आना बाकी है।

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