शराब घोटाले पर ED का एक्शन : रायपुर, धमतरी, दुर्ग में एक साथ छापे, कारोबारियों के ठिकानों पर दस्तावेज खंगाले
रायपुर/दुर्ग/धमतरी। छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार सुबह एक साथ कई शहरों में कार्रवाई की। रायपुर, दुर्ग-भिलाई और धमतरी में ED की अलग-अलग टीमों ने कई ठिकानों पर दबिश देकर दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसियों का फोकस पुराने लेन-देन और घोटाले से जुड़े रिकॉर्ड पर रहा।

रायपुर में रवि नगर स्थित कारोबारी अनूप अग्रवाल के घर पर ED की कार्रवाई चल रही है। अनूप अग्रवाल को रामगोपाल अग्रवाल के करीबी माने जाते हैं। सुबह ED की टीम उनके घर पहुंची और दस्तावेजों व रिकॉर्ड की जांच शुरू की। 8 दिन पहले ही ईडी ने रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार कर रायपुर कोर्ट में पेश किया था।
दुर्ग में बिल्डर सजल जैन के घर पर सुबह करीब 6 से 7 बजे ED की टीम पहुंची। करीब 5 अफसरों की टीम यहां जांच कर रही है।
धमतरी में शराब, कोल और कस्टम मिलिंग घोटाले में आरोपी रामगोपाल अग्रवाल के सिहावा रोड स्थित आवास और उनके भतीजे के घर भी ED ने दबिश दी है। तड़के पहुंची टीम में करीब 8 से 10 अधिकारी शामिल हैं, जो घर के अंदर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।
तीन साल में 3,200 करोड़ के घोटाले का आरोप
छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य के सबसे बड़े आर्थिक मामलों में से एक माना जाता है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की जांच के अनुसार, साल 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब 3,200 करोड़ रुपए का अवैध घोटाला हुआ। मामले में कई आईएएस अधिकारी, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच तथा अदालती प्रक्रिया जारी है।
कोयला कारोबार में प्रति टन वसूली का आरोप
छत्तीसगढ़ का कथित कोल लेवी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबार में अवैध वसूली के आरोपों से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के अनुसार, कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन तय राशि अवैध रूप से वसूली गई।
जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 540 करोड़ रुपए की अवैध लेवी वसूली गई। मामले में कई आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, बिचौलियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच और सुनवाई जारी है।
क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला...
छत्तीसगढ़ का कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला धान की मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा मामला है।
आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच प्रोत्साहन राशि बढ़ाने और उसके भुगतान में नियमों का उल्लंघन कर चुनिंदा राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में करीब 127 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ।
मामले में तत्कालीन अधिकारियों, राइस मिलर्स और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
आज की कार्रवाई ने पुराने मामलों को फिर चर्चा में ला दिया है। रायपुर से लेकर धमतरी और दुर्ग तक ED की जांच जारी है। टीमों की जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और रिकॉर्ड आगे की कार्रवाई की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल एजेंसी की ओर से छापे की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
