दुर्ग पुलिस तबादलों पर विवादित शिकायत: शिकायतकर्ता के पुराने रिकॉर्ड गड़बड़, अब विभागीय रंजिश की आशंका
दुर्ग । जिले में पुलिस अधिकारियों की नई पदस्थापना सूची जारी होने के बाद नया विवाद खड़ा खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता और भाजपा नेता खूबलाल ध्रुव द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और सीबीआई को शिकायत भेजी गई है। जिसमें दावा किया गया है कि हाल ही में हुए पुलिस अधिकारियों के तबादलों में पुलिस विभाग द्वारा अनियमितता बरती गई है। शिकायत पत्र में पुलिस अधिकारी अनंत साहू सहित मणि शंकर चंद्र, कौशलेन्द्र पटेल, विशाल सोन, देवांश राठौर, विंधराज, चंद्रप्रकाश तिवारी और अन्य पर आरोप लगाया गया है कि इनकी पोस्टिंग में पुराने संपर्कों और अनुचित माध्यमों का सहारा लिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह रसूखदार अधिकारी हैं और उनके मंत्रालय में उच्च पकड़ है जिसके चलते इनका तबादला मनचाही जगह पर किया गया है।
इधर पुलिस मुख्यालय और जिले के प्रशासनिक सूत्रों से जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है, वह पूरी तरह से अलग कहानी बयां करती है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि ये सभी तबादले पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से और कानून-व्यवस्था की प्रशासनिक जरूरत को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। जिन पुलिस अधिकारियों के नाम इस शिकायत में शामिल हैं, वे अपने रूटीन काम का हिस्सा हैं और पुलिस रेगुलेशन के तहत ही उनकी पदस्थापना हुई है।
इस मामले का दूसरा और ध्यान खींचने वाला पहलू खुद शिकायतकर्ता खूबलाल ध्रुव का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शिकायतकर्ता पर पहले भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो चुका है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने इस तरह का पत्राचार किया हो। बिना किसी पुख्ता प्रमाण के और सिर्फ राजनीति से प्रेरित होकर लगातार अधिकारियों पर आरोप लगाना उनकी कार्यप्रणाली का हिस्सा रहा है। ऐसी शिकायतों का मुख्य मकसद अक्सर काम कर रहे अधिकारियों पर बेवजह का दबाव बनाना होता है।
इसके साथ ही, इस पूरी शिकायत पत्र की भाषा और उसमें शामिल की गई पुलिस विभाग के भीतर की गोपनीय विषयों ने एक नई बहस छेड़ दी है। पुलिस महकमे के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि किसी बाहरी व्यक्ति के पास विभाग की इतनी अंदरूनी और पुरानी पदस्थापनाओं की डिटेल होना संभव नहीं है। जिससे यह आशंका प्रबल है कि पुलिस विभाग के ही किसी अधिकारी ने आपसी रंजिश के चलते पीछे से यह सारा इनपुट शिकायतकर्ता को मुहैया कराया है। इस तरह एक बाहरी व्यक्ति का मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर विभाग के भीतर अपने निजी हित साधने की कोशिश की जा रही है।
