कोयला घोटाले में 49.73 करोड़ की संपत्ति अटैच, ED की कार्रवाई पर हाईकोर्ट में बहस, फैसला सुरक्षित
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ईडी द्वारा सौम्या चौरसिया और सूर्यकांत तिवारी सहित उनके परिवार की संपत्तियां अटैच करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर हाईकोर्ट में पांच दिनों तक सुनवाई चली। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि ईडी ने बिना वैध दस्तावेजों के उनकी संपत्तियों को अवैधानिक तरीके से कुर्क किया है।
दरअसल ईडी ने अवैध कोयला लेवी घोटाले के मामले में मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी और अन्य से संबंधित पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के तहत 30 जनवरी 2025 तक 49.73 करोड़ रुपये मूल्य की 100 से अधिक चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है। इन संपत्तियों में बैंक बैलेंस वाहन नकदी आभूषण और जमीन शामिल हैं।
ईडी की जांच में यह सामने आया है कि कुछ लोगों ने पिछली सरकार में रहे नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों से मिलीभगत कर कोयला ट्रांसपोर्टरों से जबरन वसूली की थी। ईडी ने इस मामले में कथित मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी के साथ उनके भाई रजनीकांत तिवारी कैलाशा तिवारी दिव्या तिवारी सौम्या चौरसिया उनके भाई अनुराग चौरसिया मां शांति देवी समीर विश्नोई और अन्य की भी संपत्ति अटैच की है। इन संपत्तियों को अटैच करने के खिलाफ हाईकोर्ट में अलग अलग 10 याचिकाएं दायर की गई हैं।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में इस केस की लगातार पांच दिनों तक सुनवाई हुई। अपीलकर्ताओं के वकील हर्षवर्धन परगनिहा निखिल वार्ष्णेय शशांक मिश्रा और अभ्युदय त्रिपाठी ने अपनी दलीलें पेश कीं। वकीलों का कहना था कि ईडी ने केवल सहआरोपियों के बयानों के आधार पर संपत्तियों को जब्त किया है। जांच में ईडी ने यह तो कह दिया है कि प्रापर्टी कोयला घोटाले से अर्जित की गई है लेकिन इसका कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस अहम मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी को हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।
