घर का सपना दिखाकर बिल्डरों ने की 11 करोड़ की ठगी, 50 डिफाल्टर बिल्डरों पर कार्यवाही का इंतजार

घर का सपना दिखाकर बिल्डरों ने की 11 करोड़ की ठगी, 50 डिफाल्टर बिल्डरों पर कार्यवाही का इंतजार

रायपुर। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। आम आदमी खून पसीना एक करके अपने सपनो का घर खरीदने के लिए पैसे जुटाता है। लेकिन सफेदपोश बिल्डर उनके इन सपनो को रौंद रहे हैं। प्रदेश के 50 से ज्यादा बिल्डरों ने जनता के 11 करोड़ रुपये दबा रखे हैं। लोग अपने ही पैसों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

रकम लेने के बाद इन बिल्डरों ने न तो प्रॉपर्टी दी और न ही पैसे लौटाए। यह किसी एक परिवार का दर्द नहीं है। यह उन सैकड़ों परिवारों की कहानी है जिन्होंने एक आशियाने के लिए अपनी पाई पाई जोड़कर बिल्डरों के हाथ में सौंप दी थी। अब इन परिवारों के पास न्याय की गुहार लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

 

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कलेक्टरों के पास जब्ती का अधिकार, फिर भी सुस्ती

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हालात यह हैं कि रेरा के द्वारा जारी आदेशों के बावजूद जिला प्रशासन सुस्त बैठा है। छत्तीसगढ़ रेरा ने आम लोगों की गाढ़ी कमाई वापस दिलाने के लिए सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखा है। पत्र में स्पष्ट निर्देश हैं कि डिफाल्टर बिल्डरों की संपत्ति जब्त की जाए। अगर वे फिर भी पैसे न दें तो उन्हें जेल की हवा खिलाई जाए। विडंबना देखिए कि बीते दो तीन सालों में चार पांच बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी कलेक्टरों ने कोई जब्ती नहीं की है। इससे बिल्डरों के हौसले बुलंद हैं और पीड़ित परिवार हताश।

 

रायपुर और दुर्ग में सबसे ज्यादा लूट

रिकवरी की सूची पर नजर डालें तो सबसे बुरी स्थिति रायपुर की है। नियमानुसार कोई भी बिल्डर अगर डिफाल्टर साबित होता है तो रेरा तुरंत खरीदार के पक्ष में आदेश जारी कर जिला प्रशासन को भेजता है। इसके बाद कलेक्टर और तहसीलदार को वसूली करनी होती है। राजनांदगांव में कुछ साल पहले एक बिल्डर से महज चार लाख की वसूली के लिए जब्ती हुई थी। इसके अलावा किसी भी बड़े बिल्डर पर आज तक कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ।

 

किस शहर में फंसी है कितनी रकम

शहर  - वसूली योग्य रकम |

 रायपुर | 6.2 करोड़ 

 दुर्ग  । 2.9 करोड़ |

 बिलासपुर | 1.2 करोड़ 

सूरजपुर | 42 लाख 

 बलौदाबाजार | 7.70 लाख 

राजनांदगांव | 4 लाख 

 महासमुंद | 4 लाख 

रायगढ़ | 1 लाख 

 

क्या है आरआरसी और कैसे मिलता है न्याय

आरआरसी ( रेवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट) एक सुरक्षा निधि है जो बिल्डर को प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले रेरा के पास जमा करनी होती है। प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ने या डिफाल्टर होने पर प्रशासन इसी निधि को तोड़कर निवेशकों का पैसा लौटाता है। इसे जब्त करने का पूरा अधिकार कलेक्टर के पास होता है।

छत्तीसगढ़ रेरा की रजिस्ट्रार आस्था राजपूत का कहना है कि डिफाल्टर बिल्डरों से वसूली के लिए संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पहले ही सूचना दी जा चुकी है। प्रशासन को याद दिलाने के लिए एक बार फिर से सूची के साथ रिमाइंडर भेजा जाएगा।

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