West Bengal Politics: TMC के नाम-चिह्न पर EC का बड़ा फैसला, दोनों गुटों को चुनना होगा नया नाम-सिंबल; उपचुनाव से पहले बदला पूरा समीकरण

West Bengal Politics: TMC के नाम-चिह्न पर EC का बड़ा फैसला, दोनों गुटों को चुनना होगा नया नाम-सिंबल; उपचुनाव से पहले बदला पूरा समीकरण

नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक खींचतान अब चुनावी पहचान के सवाल तक पहुंच गई है। चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी कर दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में ‘All India Trinamool Congress’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘Flowers & Grass’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यह व्यवस्था फिलहाल उपचुनावों के लिए लागू रहेगी; पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार का फैसला अभी बाकी है।

TMC की पहचान पर ही लगी अस्थायी रोक
मामला तब चुनाव आयोग के सामने पहुंचा जब पार्टी के भीतर दो गुटों ने संगठन और चुनावी पहचान पर अपना-अपना दावा पेश किया। एक पक्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, जबकि दूसरे गुट की अगुवाई रिताब्रता बनर्जी कर रही हैं। दोनों पक्षों ने पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर अधिकार का दावा किया है। आयोग ने दोनों पक्षों से दस्तावेज और संगठनात्मक दावों से जुड़े रिकॉर्ड मांगे और सुनवाई की। आयोग के मुताबिक, मौजूदा विवाद को उपचुनाव से पहले अंतिम रूप से तय करना संभव नहीं था। इसलिए तत्काल चुनावी व्यवस्था के लिए दोनों गुटों को अलग पहचान देने का अंतरिम रास्ता अपनाया गया है।

अब EVM पर नहीं दिखेगा TMC का पुराना चुनाव चिह्न
इस अंतरिम व्यवस्था का सीधा असर 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों पर पड़ेगा। दोनों गुट अब इन चुनावों में मूल TMC नाम और आरक्षित ‘Flowers & Grass’ प्रतीक के साथ मैदान में नहीं उतर सकेंगे। आयोग ने दोनों पक्षों को नए नाम और उपलब्ध ‘फ्री सिंबल’ में से विकल्प चुनने को कहा है। आयोग के निर्देश के अनुसार, दोनों गुटों को अपने पसंदीदा तीन नाम और तीन चुनाव चिह्न के विकल्प देने हैं। इसके बाद उपचुनाव के लिए आयोग की ओर से अलग पहचान आवंटित की जाएगी।

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यह अंतिम फैसला नहीं है
चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश अंतरिम व्यवस्था है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आयोग ने स्थायी तौर पर यह तय कर दिया है कि TMC के मूल नाम और चुनाव चिह्न पर किस गुट का अधिकार रहेगा। पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, दस्तावेजों और दोनों पक्षों के दावों पर आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी। अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भविष्य में मूल पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कौन कर सकेगा।

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दोनों गुटों के सामने अब नई चुनावी चुनौती
उपचुनावों में दोनों पक्षों के उम्मीदवार पहले ही मैदान में हैं। ऐसे में चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश अब उनके प्रचार, पोस्टर, बैनर और EVM पर दिखाई देने वाली चुनावी पहचान को प्रभावित करेगा। यानी मतदाताओं के सामने इस बार पारंपरिक TMC नाम और उसका परिचित चुनाव चिह्न नहीं होगा। दोनों गुटों को नए नाम और नए प्रतीक के साथ अपनी पहचान बनानी होगी।

आयोग ने क्यों अपनाया यह रास्ता?
आयोग के सामने तत्काल चुनौती यह थी कि पार्टी की वैध पहचान पर विवाद रहते हुए उपचुनाव कराए जाएं तो दोनों गुट एक ही नाम और प्रतीक का दावा कर सकते थे। इससे चुनावी प्रक्रिया में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती थी। इसी वजह से आयोग ने फिलहाल दोनों पक्षों को मूल नाम और प्रतीक से अलग रखते हुए अलग-अलग चुनावी पहचान देने का रास्ता अपनाया है। आयोग ने कहा है कि यह व्यवस्था दोनों समूहों को समान आधार पर चुनाव लड़ने का अवसर देने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए की गई है।

अब आगे क्या होगा?
फिलहाल, दोनों गुटों को अपने वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने हैं। इसके बाद आयोग उपचुनाव के लिए अलग-अलग पहचान आवंटित करेगा। इसके समानांतर पार्टी के नाम, संगठनात्मक नियंत्रण और आरक्षित चुनाव चिह्न को लेकर मूल विवाद पर आगे की सुनवाई और प्रक्रिया जारी रहेगी। यानी फिलहाल TMC का नाम और ‘Flowers & Grass’ प्रतीक सिर्फ आगामी उपचुनावों के लिए फ्रीज हुआ है; पार्टी की स्थायी पहचान पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

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