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रायपुर में भूमाफियाओं का बड़ा खेल: बसंत अग्रवाल ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर बेची, RTI से खुलासा; SDM बोले- कोई नहीं बचेगा
रायपुर. शहर में जमीन के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रसूखदार जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल और उनके साथियों ने सरकारी जमीन को अपनी बपौती समझ लिया। इन लोगों ने न सिर्फ सरकारी जमीन पर बेखौफ कब्जा किया, बल्कि वहां अवैध प्लॉटिंग कर उसे बेच भी दिया। अब आरटीआई (RTI) से मिली एक जांच रिपोर्ट ने इन भूमाफियाओं की पोल खोल दी है। इस खुलासे के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है और एसडीएम ने सीधे एक्शन के आदेश दे दिए हैं।
जांच रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
धरसींवा तहसीलदार ने बीते 18 फरवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को एक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। यह रिपोर्ट अब RTI के जरिए आम जनता के सामने आ गई है। रिपोर्ट चीख-चीख कर बता रही है कि कैसे गिरौद गांव में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। चारागाह और पानी के भराव वाली सरकारी जमीन को भी इन कारोबारियों ने नहीं छोड़ा।
SDM का सख्त एक्शन, भेजे दो लेटर
मामले की गंभीरता को देखते हुए SDM नंदकुमार चौबे ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि जांच रिपोर्ट मिल गई है और तहसीलदार को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई में कोई कोताही न हो, इसके लिए दो लेटर भी जारी किए गए हैं। SDM ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में जिन भी लोगों के नाम दर्ज हैं, उनमें से कोई नहीं बचेगा, सब पर गाज गिरेगी।
जानिए कैसे खेला गया जमीन का यह पूरा खेल:
चारागाह की जमीन पर कब्जा: खसरा नंबर 638 (रकबा 1.019 हे.) सरकारी रिकॉर्ड में चारागाह दर्ज है। बसंत अग्रवाल ने इसके 0.200 हे. हिस्से पर कब्जा कर लिया। वहां मुरुम डालकर रास्ता बनाया और अवैध प्लॉटिंग कर उसे प्रिंस अग्रवाल को बेच दिया।
तालाब की जमीन भी नहीं छोड़ी: ग्राम गिरौद के ही परमानंद साहू ने खसरा नंबर 644, 639 और 634 पर गड़बड़ी की। यह वो जमीन है जो सरकारी रिकॉर्ड में 'पानी के नीचे' (जलाशय/तालाब) दर्ज है।
खेतों की मेड़ तोड़कर 60 फीट का रास्ता: रायपुर के ओमप्रकाश सरवैया ने खसरा नंबर 647/1 (कंसलाल साहू के नाम) और 647/2 (पुष्पा व दर्शना पटेल के नाम) पर कब्जा जमाया। खेतों की मेड़ को समतल कर धड़ल्ले से 60 फीट चौड़ा रास्ता बना दिया और यहां अवैध प्लॉटिंग की जा रही है।
आरोपी कारोबारी ने साधी चुप्पी
सरकारी जमीन लूटने का यह मामला सामने आने के बाद मीडिया ने बसंत अग्रवाल से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन आरोपों पर सफाई देने के लिए वे सामने नहीं आए और उनसे बात नहीं हो सकी।
फिलहाल, आरटीआई के इस बम ने जमीन के काले कारोबार की जड़ें हिला दी हैं। प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में है। अब लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले इन रसूखदारों पर प्रशासन का बुलडोजर कब चलता है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
