एंबुलेंस नहीं मिली तो खाट बनी सहारा! बीमार महिला को कंधों पर उठाकर अस्पताल ले गए परिजन, VIDEO वायरल
सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से सामने आया एक वीडियो दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं की जमीनी हकीकत को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। एलंपल्ली गांव में एक बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए उसके परिजनों को खाट को अस्थायी स्ट्रेचर बनाना पड़ा। वाहन की तत्काल व्यवस्था नहीं हो पाने के बाद परिवार के लोग महिला को खाट पर लिटाकर बारी-बारी से कंधों पर उठाते हुए अस्पताल की ओर रवाना हुए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है।
तीन दिन से बुखार, बिगड़ी तबीयत तो बढ़ी परेशानी
जानकारी के अनुसार एलंपल्ली निवासी 45 वर्षीय माड़वी पाले पिछले करीब तीन दिनों से बुखार से पीड़ित थीं। अचानक तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिवार ने उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की। लेकिन तत्काल वाहन की व्यवस्था नहीं हो सकी। आखिरकार परिजनों ने खाट का सहारा लिया। महिला को उसी पर लिटाकर परिवार के सदस्य बारी-बारी से उसे उठाते रहे और कई किलोमीटर का रास्ता तय कर जगरगुंडा अस्पताल पहुंचे। इस दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए परिजन बेहद सावधानी से खाट को उठाकर आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
VIDEO सामने आने के बाद व्यवस्था पर सवाल
इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सुकमा के अंदरूनी और दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर आपात स्थिति में यदि मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सड़क और वाहन दोनों की सुविधा समय पर उपलब्ध न हो, तो परिवार के सामने किस तरह की मुश्किलें आती हैं, यह घटना उसकी तस्वीर दिखाती है। दूरस्थ इलाकों में कई गांव अब भी अस्पतालों और मुख्य सड़कों से काफी दूरी पर हैं। ऐसे में एंबुलेंस की उपलब्धता और अंतिम छोर तक पहुंचने वाली परिवहन व्यवस्था मरीजों के लिए बेहद अहम हो जाती है।
एंबुलेंस चालक ने बताई अलग वजह
मामले में एंबुलेंस चालक की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। चालक का कहना है कि परिजनों ने एंबुलेंस के लिए फोन नहीं किया था। साथ ही उसने यह भी बताया कि संबंधित वाहन कुछ दिनों से खराब था। इस दावे के बाद मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि परिवार को आपात स्थिति में उपलब्ध स्वास्थ्य परिवहन सुविधा की जानकारी थी या नहीं और खराब वाहन की जगह वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी। इन पहलुओं की स्थिति संबंधित विभाग की जांच और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।
दूरस्थ इलाकों में ‘आखिरी मील’ की चुनौती
सुकमा जैसे भौगोलिक रूप से कठिन और दूरस्थ जिले में स्वास्थ्य सेवा सिर्फ अस्पताल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। मरीज को गांव से स्वास्थ्य केंद्र तक समय पर पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। एलंपल्ली की यह घटना इसी ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ की चुनौती को सामने लाती है। फिलहाल वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के सामने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गंभीर मरीजों के लिए गांव स्तर से अस्पताल तक तत्काल परिवहन सुविधा कितनी आसानी से उपलब्ध है।
