सड़क हादसे से ज्यादा घातक साबित हुई सिस्टम की सुस्ती? फरसगांव में घायल युवक की मौत पर स्वास्थ्य व्यवस्था कटघरे में

सड़क हादसे से ज्यादा घातक साबित हुई सिस्टम की सुस्ती? फरसगांव में घायल युवक की मौत पर स्वास्थ्य व्यवस्था कटघरे में

फरसगांव: फरसगांव में एक सड़क हादसे के बाद घायल युवक की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि समय पर एंबुलेंस और जरूरी चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण एक घायल युवक की जान चली गई। घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है और लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि मौत की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन परिजनों के आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम बड़ेडोगर बेलभाटा के पास पिकअप और बाइक की टक्कर में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दोनों को तत्काल फरसगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किए जाने की बात कही गई। लेकिन यहीं से सवालों का सिलसिला शुरू हो गया है। परिजनों का आरोप है कि गंभीर स्थिति के बावजूद मरीजों को समय पर रेफर नहीं किया जा सका और जरूरी इंतजामों में देरी होती रही।

मृतक के परिवार का दावा है कि रात करीब 8 बजे एंबुलेंस सेवा को सूचना दे दी गई थी, लेकिन वाहन कई घंटे बाद अस्पताल पहुंचा। उनका आरोप है कि इस दौरान घायल युवक अस्पताल में ही जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर खामियों की ओर संकेत माना जाएगा।

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परिजनों ने यह आरोप भी लगाया है कि घायल युवक को आवश्यक ऑक्सीजन सहायता और लगातार चिकित्सकीय निगरानी नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि समय रहते पर्याप्त उपचार मिलता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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युवक की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है, लेकिन सुधार के दावे अक्सर जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।

फरसगांव की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही है कि आपातकालीन परिस्थितियों में स्वास्थ्य तंत्र कितना तैयार और जवाबदेह है। अब सभी की निगाहें जांच पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि युवक की मौत केवल सड़क हादसे का परिणाम थी या फिर समय पर मदद न मिलने की वजह से एक और जिंदगी सिस्टम की खामियों की भेंट चढ़ गई।

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