राष्ट्रपति भवन में गूंजेगी छत्तीसगढ़ की गेड़ी नृत्य की थाप, बिलासपुर के कलाकारों को मिला विशेष आमंत्रण
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति अब देश के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में से एक राष्ट्रपति भवन में अपनी पहचान बनाने जा रही है । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले ‘एट होम’ कार्यक्रम में बिलासपुर के लोक श्रृंगार भारती गेड़ी लोक नृत्य दल को विशेष प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया है । यह बिलासपुर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है । भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से मिले आमंत्रण के बाद गेड़ी नृत्य दल के कलाकार सोमवार, 10 अगस्त को संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। दल के कलाकार राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे ।
पारंपरिक वेशभूषा में होगी गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति
लोक श्रृंगार भारती के अध्यक्ष अनिल कुमार गढ़ेवाल के नेतृत्व में कलाकार राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक गेड़ी लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगे । इस दौरान कलाकार छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे और गेड़ी नृत्य के माध्यम से प्रदेश की लोक परंपरा, संस्कृति और ग्रामीण जीवन की झलक प्रस्तुत करेंगे । 15 और 16 अगस्त को होने वाली प्रस्तुतियों में देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों के बीच छत्तीसगढ़ की लोक कला को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा । इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी प्रदेश की पारंपरिक गेड़ी नृत्य कला की प्रस्तुति देने का अवसर कलाकारों को प्राप्त होगा ।
बिलासपुर के लिए गौरव का क्षण
राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर प्रस्तुति के लिए बिलासपुर के गेड़ी नृत्य दल का चयन होने से जिले के कलाकारों और लोक कला से जुड़े लोगों में उत्साह है । इसे छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है । दल के चयन पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक, नगर विधायक अमर अग्रवाल, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला और विधायक धर्मजीत सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने कलाकारों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं ।
राष्ट्रपति भवन तक पहुंचेगी छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा
गेड़ी नृत्य छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी पारंपरिक लोक कलाओं में शामिल है । राष्ट्रपति भवन में इसकी प्रस्तुति से न केवल बिलासपुर के कलाकारों को राष्ट्रीय मंच मिलेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भी देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा ।
