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शर्मनाक: कलेक्ट्रेट में तिरंगे के साथ फहरा काला झंडा, साहबों की गाड़ियां निकलती रहीं मगर.... पढ़े पूरा मामला
रायगढ़। गणतंत्र दिवस पर जब भारत देश तिरंगे के गौरव में डूबा था, उसी दौरान रायगढ़ कलेक्ट्रेट परिसर से एक ऐसी चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई जिसने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी। जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के ठीक सामने एक सामाजिक कार्यकर्ता ने काला झंडा फहरा दिया। इस असामान्य घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी, बल्कि प्रशासनिक गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि करीब आधे घंटे तक यह काला झंडा परिसर में लहराता रहा और वहां से गुजरने वाले बड़े अफसरों ने इसे हटाने तक की हिम्मत नहीं दिखाई।
प्रशासन और औद्योगिक घरानों की साठगांठ पर प्रहार...
काला झंडा सुविख्यात सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा ने फहराया उन्होंने इसे प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की नीतियों के खिलाफ शोक और विरोध का प्रतीक बताया। श्री शर्मा ने कहा कि रायगढ़ के कलेक्टर आम जनता के बजाय अडानी और जिंदल जैसे बड़े औद्योगिक घरानों के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार जिले की जनता पिछले 20 सालों से प्रदूषण, सड़क हादसों और औद्योगिक दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा रही है, लेकिन शासन और प्रशासन का ध्यान जनता पर बिल्कुल भी नहीं है सड़क दुर्घटना आम हो गई है।बच्चे अनाथ हो रहे है घर के मुखिया अकाल मौत के गाल में समा रहे है मगर अधिकारी नेताओं और औद्योगिक घरानों की पै लगी में जुटे हुए है।
अफसरों की मौजूदगी में होता रहा विरोध हल्के में लिया अनदेखी पर भी....
कलेक्ट्रेट जैसे अति सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में यह घटना प्रशासनिक संवेदनहीनता का बड़ा उदाहरण बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार काला झंडा फहराए जाने के बाद कई अधिकारियों की गाड़ियां वहां से गुजरीं, लेकिन किसी ने भी उसे उतरवाने की पहल नहीं की। ऐसा लगा मानो अफसर किसी अनचाहे विवाद से बचने के लिए अपनी नजरें चुरा रहे थे। हद तो तब हो गई जब शाम 5 बजकर 40 मिनट पर तिरंगे को सम्मानपूर्वक उतारा गया, तब तक वह काला झंडा वहां फहराते हुए अफसरों को सहसा चिढ़ाता रहा...
जनता के दर्द को बनाया मुद्दा
राधेश्याम शर्मा ने कहा कि रायगढ़ में उद्योगों के नाम पर विनाश का खेल चल रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में रोज हो रही मौतों और जहरीले धुएं से बर्बाद हो रही सेहत पर प्रशासन की चुप्पी अब बर्दाश्त से बाहर है। उन्होंने न्यायपालिका और कार्यपालिका दोनों के कामकाज को असंवैधानिक करार देते हुए विरोध दर्ज कराया। इस घटना के बाद से ही जिले के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
जांच और कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने इस पर चुप्पी साध रखी है। लेकिन सार्वजनिक रूप से हुए इस विरोध ने यह साफ कर दिया है कि रायगढ़ में औद्योगिक प्रदूषण और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच भारी असंतोष पनप रहा है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट प्रत्यक्षदर्शियों के दावों और मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता के बयानों के आधार पर तैयार की गई है। प्रशासन की ओर से अधिकृत जानकारी आने पर तथ्यों में बदलाव संभव है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
