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छत्तीसगढ़ में अब हुड़दंग के त्यौहार होली और गांधी निर्वाण दिवस पर भी छलकेगा जाम
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब प्रेमियों और कारोबारियों पर बड़ी मेहरबानी दिखाई है। नई आबकारी नीति के तहत सरकार ने होली और महात्मा गांधी निर्वाण दिवस (30 जनवरी) जैसे दिनों से ड्राई डे का टैग हटा दिया है। यानी अब इन त्योहारों पर भी शराब की दुकानें खुली रहेंगी। इतना ही नहीं, सरकार ने बार लाइसेंस की फीस में भारी कटौती कर दी है, जिससे अब बड़े शहरों के होटलों में शराब परोसना सस्ता हो जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे पर्यटन और निवेश बढ़ेगा, लेकिन असलियत यह है कि अब शराब का कारोबार गली-मोहल्लों से निकलकर एयरपोर्ट तक पहुंचने वाला है।
बार संचालकों को होगी 6 लाख की सीधी बचत
सरकार ने 7 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में बार खोलने की राह आसान कर दी है। एफएल-2 और एफएल-3 श्रेणी के बार लाइसेंस के लिए अब 24 लाख की जगह सिर्फ 18 लाख रुपए चुकाने होंगे। सीधे 6 लाख रुपए की इस छूट से नए कारोबारियों के लिए बाजार में आना सस्ता हो गया है। आबकारी विभाग के सूत्रों ने बताया कि बैंक गारंटी के नियमों में भी ढील दी गई है, ताकि जिनके पास पैसा है वे कागजी कार्रवाई में न फंसे। यानी अब पॉश इलाकों में बार खुलने की रफ्तार और तेज होने वाली है।
त्योहारों पर खुली रहेंगी दुकानें
नई नीति का सबसे चौंकाने वाला फैसला ड्राई डे की संख्या घटाना है। पहले से तय सात ड्राई डे में से तीन को खत्म कर दिया गया है। अब होली, मोहर्रम और 30 जनवरी (गांधी निर्वाण दिवस) को शराब बेचने पर रोक नहीं होगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे राजस्व बढ़ेगा। हालांकि, आम लोगों में चर्चा है कि होली जैसे हुड़दंग वाले त्योहार पर शराब की छूट देना आग में घी डालने जैसा है, जिससे अपराध बढ़ सकते हैं।
अब एयरपोर्ट पर भी मिलेगी शराब
तीन सितारा होटलों और क्लबों के लिए तो यह नीति फायदे का सौदा साबित हुई है। रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर भी अब बार खोलने की मंजूरी दे दी गई है। इसे साल 2026-27 के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। अब फ्लाइट के इंतजार में बैठे यात्री एयरपोर्ट के रेस्टोरेंट में ही जाम छलका सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे विदेशी और कॉरपोरेट यात्रियों को सुविधा होगी।
बोतलों से होकर गुजरेगा विकास का रास्ता?
आंकड़ों के मुताबिक, लाइसेंस फीस कम होने से प्रदेश में बार की संख्या में 20 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार इसे कारोबारी सुधार बता रही है, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अब रेस्टोरेंट जाना भी शराब के माहौल में जाने जैसा हो जाएगा। देखना होगा कि यह फैसला अर्थव्यवस्था को कितनी मजबूती देता है या फिर सिर्फ शराब सिंडिकेट की कमाई का जरिया बनकर रह जाता है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
