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नारायणा स्कूल का 'एजुकेशन स्कैम': मान्यता 8वीं तक, पढ़ाई 12वीं की; छत्तीसगढ़ की फीस जा रही मुंबई-बेंगलुरु
बिलासपुर/रायपुर। बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और भिलाई में धड़ल्ले से चल रहे नारायणा ई-टेक्नो स्कूल अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं। शिक्षा के नाम पर यहां ऐसा 'खेल' चल रहा है, जिसने पैरेंट्स की नींद उड़ा दी है। स्कूल के पास मान्यता केवल 8वीं तक की है, लेकिन बोर्ड लगाकर 12वीं तक की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। हद तो यह है कि सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक-एक बच्चे के दो-दो यू-डाइस (U-DISE) कोड तक बनाने की बात सामने आ रही है। पैरेंट्स बिलासपुर में फीस भर रहे हैं, लेकिन पैसा सीधे मुंबई और बेंगलुरु के खातों में जा रहा है। इतने बड़े फर्जीवाड़े के बाद भी शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन मौन बैठा है।
ऐसा लगता है कि स्कूल सिर्फ जमीन पर राज्य के अंदर है, लेकिन इसका पूरा कंट्रोल और तिजोरी राज्य के बाहर से ऑपरेट हो रही है। दस्तावेजों और ग्राउंड रिपोर्ट से कई बड़े झोल सामने आए हैं।
खेल नंबर 1: अनुमति 1 से 8 तक, सिलेबस 12वीं का
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, राज्य शासन ने नारायणा ई-टेक्नो स्कूल को सिर्फ कक्षा 1 से 8 तक के संचालन की मान्यता दी है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन पैरेंट्स को झांसे में रखकर 1 से 12वीं तक सीबीएसई (CBSE) कोर्स चला रहा है। 9वीं से 12वीं कक्षा के संचालन के लिए स्कूल के पास न तो राज्य शासन की एनओसी (NOC) है और न ही सीबीएसई की मान्यता।
प्रबंधन सफाई दे रहा है कि 1 अप्रैल 2026 से मान्यता मिलेगी। बड़ा सवाल यह है कि जब मान्यता ही नहीं है, तो पिछले डेढ़ साल से जो लाखों रुपये की फीस वसूली गई, वह किस आधार पर ली गई? क्या एडमिशन के वक्त पैरेंट्स को यह सच बताया गया था?
खेल नंबर 2: फीस वसूली यहां, हिसाब-किताब राज्य के बाहर
सबसे चौंकाने वाला पहलू वित्तीय अनियमितता का है। छत्तीसगढ़ में चल रहे इन स्कूलों के नाम पर कोई अधिकृत लोकल बैंक खाता ही नहीं है। पैरेंट्स जब फीस जमा करते हैं, तो क्यूआर (QR) कोड या ऑनलाइन लिंक से पैसा सीधे "नारायण एजुकेशन सोसाइटी" के केंद्रीय खातों में चला जाता है।
राज्य स्तर पर इस पैसे का कोई ऑडिट, निगरानी या जवाबदेही नहीं है। करोड़ों का टर्नओवर हो रहा है, लेकिन लोकल स्तर पर पारदर्शिता शून्य है। शिक्षा विभाग को यह तक नहीं पता कि फीस के नाम पर वसूला गया पैसा कहां जा रहा है।
खेल नंबर 3: 'नस्पिरा' (NSPIRA) का बिना रजिस्ट्रेशन राज
कागजों की जांच में 'नस्पिरा' नाम की एक संस्था की एंट्री होती है। प्रबंधन इसे अपनी 'सिस्टर कंसर्न' बताता है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस संस्था का छत्तीसगढ़ में कोई रजिस्ट्रेशन या वैधानिक दफ्तर दर्ज ही नहीं है।
फिर भी फीस की रसीदों से लेकर नियुक्ति पत्रों तक में नस्पिरा के कर्मचारियों के साइन होते हैं। रसीद पर जो पता लिखा है, वह भी फर्जी और अधूरा है। इसके अलावा, कर्मचारियों की भर्ती भी इसी के जरिए हो रही है। आरोप है कि कर्मचारियों के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स जमा करा लिए गए हैं। पीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) का भी कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है।
अभिभावक फंसे, शिक्षा विभाग खामोश
इस पूरे स्कैम का सबसे बड़ा नुकसान पैरेंट्स और बच्चों को हो रहा है। बच्चों का भविष्य अधर में है। पैरेंट्स इस दुविधा में हैं कि फीस भरें या बच्चों को निकालें। बीच सत्र में मान्यता को लेकर अनिश्चितता से बच्चों की पढ़ाई दांव पर लग गई है। इतने सारे तथ्य और दस्तावेज सामने आने के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा लगता है कि जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जा रही है और प्रबंधन को अपने कागज दुरुस्त करने का पूरा समय दिया जा रहा है।
कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस निकली 'हवा-हवाई', नहीं दिखा सके एक भी कागज
मान्यता और फीस विवाद पर बवाल मचने के बाद स्कूल प्रबंधन ने कल आनन-फानन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। उम्मीद थी कि प्रबंधन अपने दावों को सच साबित करने के लिए दस्तावेज पेश करेगा, लेकिन यह पीसी पूरी तरह 'फ्लॉप' साबित हुई।
प्रिंसिपल और प्रबंधन के लोगों ने मीडिया के सामने बड़ी-बड़ी बातें जरूर कीं, लेकिन जब उनसे शासन की मान्यता, 9वीं से 12वीं की एनओसी और सीबीएसई एफिलिएशन का कोई मूल दस्तावेज (Document) मांगा गया, तो वे बगले झांकने लगे। उन्होंने एक भी कागज पेश नहीं किया। सिर्फ यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि 'आप खुद सरकारी पोर्टल पर जाकर चेक कर लें।'
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने यह साफ कर दिया कि स्कूल के पास दिखाने के लिए कागजात नहीं हैं। वे केवल मौखिक दलीलों और झूठे दावों के दम पर अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
