जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उम्रकैद हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला 3 हफ्ते में करना होगा सरेंडर

जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उम्रकैद हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला 3 हफ्ते में करना होगा सरेंडर

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के उस पुराने फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया है जिसमें मुख्य आरोपी अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। अदालत ने अब अमित जोगी को इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई है। आजीवन कारावास के साथ ही उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अगर अमित जोगी यह जुर्माना राशि नहीं भरते हैं तो उन्हें छह महीने की अतिरिक्त कठोर सजा काटनी होगी। यह अहम फैसला हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने 78 पन्नों में विस्तार से दिया है।

अमित जोगी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट निर्देश दिया है कि उनकी जमानत आज से केवल तीन सप्ताह तक ही मान्य रहेगी। इस समय सीमा के भीतर अमित जोगी को संबंधित ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करना होगा। अगर वे तीन हफ्ते में आत्मसमर्पण नहीं करते हैं तो ट्रायल कोर्ट उन्हें पुलिस हिरासत में ले लेगा और हाई कोर्ट द्वारा दी गई सजा पूरी करने के लिए उन्हें सीधा जेल भेज दिया जाएगा।

कोर्ट ने अपने फैसले में अमित जोगी को आईपीसी की धारा 302 और धारा 120 बी के तहत हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी माना है। हाई कोर्ट की रजिस्ट्री को यह निर्देश दिया गया है कि वह इस फैसले की एक कॉपी सीधे अमित जोगी को भेजे। साथ ही उन्हें यह भी बताया जाए कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार रखते हैं। रजिस्ट्रार न्यायिक को फैसले की सर्टिफाइड कॉपी और सभी पुराने रिकॉर्ड एक हफ्ते के भीतर निचली अदालत को भेजने का आदेश भी दिया गया है।

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मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने एक बहुत ही सख्त और अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो तो किसी एक खास आरोपी के साथ अदालत भेदभाव नहीं कर सकती। जब पुलिस का केस और सारे सबूत सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे ही थे ऐसे में एक आरोपी को बरी कर देना और बाकी सभी को उन्हीं सबूतों के आधार पर सजा देना पूरी तरह से गलत है। ऐसा तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि बरी होने वाले आरोपी के पक्ष में कोई अलग और ठोस सबूत न हो।

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इस पूरे मामले में सीबीआई ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी जिसे हाई कोर्ट ने अब स्वीकार कर लिया है। वहीं शिकायतकर्ता और रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। इसका कारण यह है कि हाई कोर्ट ने पहले ही 4 अप्रैल 2024 के फैसले में बाकी अन्य दोषियों की सजा को बरकरार रखा था इसलिए सतीश जग्गी की याचिका का अब कोई मतलब नहीं रह गया था।

यह मामला इतनी आसानी से हाई कोर्ट में दोबारा नहीं खुला था। इसके पीछे एक लंबी कानूनी लड़ाई है। राज्य सरकार ने 31 मई 2007 को निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी लेकिन हाई कोर्ट ने 18 अगस्त 2011 को इसे यह कहकर खारिज कर दिया था कि सीबीआई जांच वाले मामले में राज्य सरकार अपील नहीं कर सकती। सीबीआई ने भी जो अर्जी लगाई थी उसे 12 सितंबर 2011 को देरी का हवाला देकर कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सतीश जग्गी की याचिका भी 19 सितंबर 2011 को इसी तरह खारिज हो गई थी।

हाई कोर्ट से झटके लगने के बाद सतीश जग्गी और सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर 2025 को याचिका दायर करने में हुई देरी को माफ कर दिया और मामले को दोबारा सुनवाई के लिए बिलासपुर हाई कोर्ट भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से यह भी कहा कि वह सतीश जग्गी और राज्य सरकार को इस केस में पार्टी बनाए। इसके बाद हाई कोर्ट ने रायपुर एसपी के माध्यम से अमित जोगी और सतीश जग्गी को कोर्ट में पेश होने का नोटिस भेजा था।

यह पूरा मामला 23 साल पुराना है। 4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रामअवतार जग्गी एक बड़े कारोबारी थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बहुत करीबी थे। जब विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ आ गए थे और उन्हें प्रदेश का कोषाध्यक्ष बनाया गया था।

इस हत्याकांड में पुलिस ने कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया था। केस चलने के दौरान बलटू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। निचली अदालत ने अमित जोगी को छोड़कर 28 लोगों को दोषी ठहराया था। इन 28 दोषियों में अभय गोयल याहया ढेबर वीके पांडे फिरोज सिद्दीकी राकेश चंद्र त्रिवेदी अवनीश सिंह लल्लन सूर्यकांत तिवारी अमरीक सिंह गिल चिमन सिंह सुनील गुप्ता राजू भदौरिया अनिल पचौरी रविंद्र सिंह रवि सिंह लल्ला भदौरिया धर्मेंद्र सत्येंद्र सिंह शिवेंद्र सिंह परिहार विनोद सिंह राठौर संजय सिंह कुशवाहा राकेश कुमार शर्मा विक्रम शर्मा जबवंत और विश्वनाथ राजभर शामिल हैं। अब मुख्य आरोपी अमित जोगी को भी उम्रकैद की सजा मिल गई है।

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