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खारून रिवर फ्रंट: 13 साल में तीन बार बदला प्लान, पैसा नहीं मिला इसलिए काम रुका
रायपुर। खारून नदी को सुंदर और विकसित बनाने का प्रोजेक्ट 13 साल से सिर्फ कागजों पर ही गोता लगा रहा है। तीन बार प्लान बदलने के बावजूद अब तक नदी किनारे एक भी काम शुरू नहीं हो सका है। सबसे बड़ी वजह यह है कि इस काम के लिए अभी तक सरकार से फंड पास नहीं हुआ है। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता राजीव नशीने ने बताया कि पैसे की मंजूरी के लिए फाइल वित्त विभाग को भेजी जा चुकी है। जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, काम तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।
बार-बार बदला गया प्रोजेक्ट:
खारून नदी को संवारने का यह प्रोजेक्ट सबसे पहले बीजेपी सरकार के समय बना था। बाद में कांग्रेस ने भी अपनी योजना बनाई। साल 2018 में यह तय हुआ था कि महादेवघाट से कुम्हारी तक नदी के दोनों किनारे डेवलप किए जाएंगे, लेकिन यह प्लान भी आगे नहीं बढ़ पाया।
पुराने प्लान पर 48 लाख हुए खर्च
शुरुआत में 2009 से 2012 के बीच भी एक प्लान बना था। तब रायपुर विकास प्राधिकरण यानी आरडीए ने सर्वे और ड्राइंग पर 48 लाख रुपये खर्च कर दिए थे। लेकिन किसानों के खेत और कुछ फार्म हाउस बीच में आ रहे थे, इसलिए वह काम रोक दिया गया। इसके बाद 2018 में रायपुर से दुर्ग के बीच 18 किलोमीटर नदी किनारे को विकसित करने की योजना बनी थी, जिसकी जिम्मेदारी नगर निगम और स्मार्ट सिटी को 4 किलोमीटर तक दी गई थी।
अब महादेवघाट पर कॉरिडोर बनाने की तैयारी
अब नया फैसला यह लिया गया है कि महादेवघाट चौक, मंदिर परिसर और नदी के घाटों को संवारा जाएगा और यहाँ एक कॉरिडोर बनाया जाएगा। अधिकारियों ने दावा किया था कि पहले चरण में ही 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे और टेंडर जारी करके जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन फंड पास न होने से सारी तैयारी रुकी हुई है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
