युवती की आत्महत्या के मामले में आरोपी को हाई कोर्ट से राहत, सात साल की सजा रद्द
बिलासपुर : नहाते समय चोरी-छिपे वीडियो बनाना, फिर उसी वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग कर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बनाना, जिससे एक युवती ने आत्महत्या कर ली थी। इन आरोपों को लेकर निचली अदालत ने आरोपी को सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में दोषसिद्धि और सजा का आदेश निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने माना कि अभियोजन यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपी ने युवती को आत्महत्या के लिए उकसाया था या आत्महत्या से पहले उसे लगातार इस तरह प्रताड़ित किया था, जिससे वह यह कदम उठाने के लिए मजबूर हुई। जस्टिस एन के चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने आरोपी मोबारक अंसारी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
ब्लैकमेल कर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने का आरोप
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम गम्हरिया निवासी मोबारक अंसारी और युवती पुनीता एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे। आरोप था कि एक दिन युवती जब वॉशरूम में नहा रही थी, उसी दौरान मोबारक ने उसका वीडियो बना लिया। बाद में वीडियो दिखाकर उस पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालने लगा। मांग पूरी नहीं करने पर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी भी दी गई।
गांव में हुई थी बैठक, गलती स्वीकारने का था दावा
इस मामले को लेकर 13 जनवरी 2021 को गांव में बैठक भी हुई थी। अभियोजन का दावा था कि बैठक के दौरान मोबारक ने अपनी गलती स्वीकार की थी। उसने मोबाइल से वीडियो डिलीट करने और भविष्य में ऐसी हरकत नहीं करने का आश्वासन भी दिया था। इसके बावजूद युवती की आत्महत्या के बाद मामला गंभीर आपराधिक प्रकरण में तब्दील हो गया। निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मोबारक को दोषी ठहराते हुए सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी।
जेल से अधिवक्ता के जरिए हाई कोर्ट में दी चुनौती
सत्र न्यायालय के फैसले के बाद आरोपी जेल में सजा काट रहा था। इसी दौरान उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपील दायर कर दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी। अपील में मामले के साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों पर सवाल उठाए गए।
आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप नहीं हुआ सिद्ध
अपील की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अभियोजन के साक्ष्यों का परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन यह स्थापित नहीं कर सका कि आरोपी ने युवती को आत्महत्या के लिए उकसाया था। यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि आत्महत्या से पहले आरोपी की ओर से लगातार ऐसी प्रताड़ना की गई थी, जिसका सीधा संबंध युवती के आत्मघाती कदम से साबित हो सके। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने सत्र न्यायालय, बलरामपुर-रामानुजगंज के दोषसिद्धि और सजा संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने आरोपी मोबारक अंसारी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया। इस फैसले के साथ ही सात साल की सजा काट रहे आरोपी को कानूनी राहत मिल गई।
