बिलासपुर हाईकोर्ट में नाजिया इलाही खान के खिलाफ आपराधिक याचिका स्वीकार, नोटिस जारी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नाजिया इलाही खान के खिलाफ आपराधिक याचिका दायर किए जाने का मामला सामने आया है। याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए नाजिया इलाही खान को नोटिस जारी किया है। साथ ही, मामले में राज्य सरकार से भी जवाब मांगा गया है। याचिका में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर कानूनी कार्रवाई और न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग की गई है।
यह याचिका TNLC के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता डॉ. आमिर खान और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सितारा खान के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर की गई है। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि इस मामले को न्यायालय के समक्ष उपलब्ध तथ्यों, संबंधित एफआईआर और अन्य दस्तावेजों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
नाजिया इलाही खान पर क्या हैं आरोप?
याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार, नाजिया इलाही खान ने अपने विभिन्न भाषणों में कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान भी उन पर कथित रूप से ऐसी टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया है। इन बयानों को लेकर मुस्लिम समुदाय के विभिन्न वर्गों में नाराजगी होने की बात याचिकाकर्ता पक्ष ने कही है।
हालांकि, इन आरोपों पर न्यायालय का अंतिम निर्णय आना बाकी है। फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों को याचिकाकर्ता पक्ष के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
देश के अलग-अलग हिस्सों में शिकायतों का दावा
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि नाजिया इलाही खान के कथित बयानों को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इसी क्रम में संबंधित एफआईआर और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी आपराधिक याचिका दायर की गई है।
याचिका के माध्यम से संबंधित मामले में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने और न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि मामले को संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय के समक्ष रखा गया है, ताकि उपलब्ध तथ्यों और लागू कानूनों के आधार पर उचित निर्णय लिया जा सके।
हाईकोर्ट के नोटिस को बताया महत्वपूर्ण कदम
याचिका स्वीकार किए जाने और संबंधित पक्ष को नोटिस जारी होने के बाद याचिकाकर्ता पक्ष ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। TNLC के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता डॉ. आमिर खान और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सितारा खान के अनुसार, न्यायालय में मामले को तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
याचिकाकर्ता पक्ष को उम्मीद है कि हाईकोर्ट मामले से जुड़े सभी पहलुओं, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनों पर विचार करते हुए निष्पक्ष निर्णय करेगा। राज्य सरकार से जवाब मांगे जाने के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया में मामले की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव पर जोर
याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि धार्मिक आस्थाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में कानून का पालन, सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान आवश्यक है। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया और कानून के अनुरूप ही होनी चाहिए।
फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी। याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
