CBSE ने 10वीं में बदला नियम, जिससे बदल गया छात्रों की बोर्ड परीक्षा का पूरा पैटर्न
नई दिल्ली : दसवीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए सीबीएसई ने विषय योजना में बड़ा बदलाव किया है। नए शैक्षणिक सत्र 2027-28 से दसवीं कक्षा में पहुंचने वाले विद्यार्थियों को पर्यावरण शिक्षा नहीं पढ़नी होगी। इतना ही नहीं, बोर्ड ने विषयों के चयन से लेकर परीक्षा और रिजल्ट तक के नियमों में भी बदलाव किया है। नई व्यवस्था में पढ़ाई का बोझ कम करने के साथ विद्यार्थियों को अपनी रुचि और भविष्य के करियर के मुताबिक विषय चुनने का अवसर देने पर जोर दिया गया है।
पांच विषयों की परीक्षा देना अनिवार्य, छठे में मिलेगी पसंद की आजादी
सीबीएसई की नई व्यवस्था के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2027-28 से दसवीं की बोर्ड परीक्षा में पांच विषय अनिवार्य होंगे। इनमें पहली भाषा (आर-1), दूसरी भाषा (आर-2), गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान शामिल हैं। इन सभी विषयों में विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा देनी होगी और उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। इसके अलावा विद्यार्थियों को एक वैकल्पिक विषय चुनने का मौका मिलेगा। वे अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार उन्नत गणित, उन्नत विज्ञान अथवा व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत उपलब्ध कौशल विषयों में से किसी एक का चयन कर सकेंगे।
22 कौशल विषयों से खुलेंगे करियर के नए रास्ते
नई विषय योजना में बोर्ड ने व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को भी महत्व दिया है। इसके तहत विद्यार्थियों के पास सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा साइंस, हेल्थ केयर, कृषि, बैंकिंग एवं बीमा, पर्यटन, खुदरा कारोबार, सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर तथा डिजाइन थिंकिंग एवं नवाचार जैसे कुल 22 कौशल विषयों में से चयन का विकल्प होगा। खास बात यह है कि कौशल विषय चुनने वाले विद्यार्थियों को इसके लिए अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। इन विषयों का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को किताबी पढ़ाई के साथ व्यावहारिक और रोजगार से जुड़े कौशल सीखने का अवसर मिलेगा।
गणित-विज्ञान में कमजोर हुए तो कौशल विषय बन सकता है सहारा
नई व्यवस्था का सबसे अहम पहलू विषय प्रतिस्थापन का नियम है। यदि कोई विद्यार्थी गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान में से किसी एक विषय में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक हासिल करने में असफल रहता है, लेकिन उसके चुने हुए कौशल विषय में उत्तीर्ण अंक हैं, तो निर्धारित नियमों के तहत संबंधित मुख्य विषय को कौशल विषय से बदला जा सकेगा। इससे विद्यार्थियों को एक विषय में कमजोर प्रदर्शन के कारण परिणाम प्रभावित होने से राहत मिल सकती है। हालांकि, यह सुविधा बोर्ड के निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार ही मिलेगी।
9 वीं के पाठ्यक्रम से भी हटाए गए कई विषय
बोर्ड ने केवल दसवीं की विषय योजना ही नहीं बदली है, बल्कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में भी संशोधन किया है। इसके तहत 'इंडिविजुअल्स इन सोसाइटी' विषय के साथ 'मॉड्यूल ऑफ कम्प्यूटेशनल थिंकिंग' और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े मॉड्यूल को भी हटाया गया है। हालांकि, इन बदलावों का असर वर्तमान में दसवीं कक्षा में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर नहीं पड़ेगा। उनके लिए पहले से लागू विषय योजना ही जारी रहेगी।
सीबीएसई की नई पहल में दसवीं की पढ़ाई को पारंपरिक विषयों तक सीमित रखने के बजाय कौशल आधारित शिक्षा की ओर बढ़ाने का संकेत मिलता है। अब विद्यार्थियों के सामने केवल बोर्ड परीक्षा पास करने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि अपनी रुचि के अनुसार भविष्य की तैयारी करने का विकल्प भी होगा।
