संजू त्रिपाठी हत्याकांड में आया फैसला, सबूतों के अभाव में भाई कपिल समेत सभी 22 आरोपी बरी
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कांग्रेस नेता और हिस्ट्रीशीटर संजू त्रिपाठी हत्याकांड में जिला अदालत के फैसले ने पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। जिस हत्याकांड ने दिसंबर 2022 में पूरे प्रदेश को दहला दिया था, उसी मामले में शुक्रवार को अदालत ने मुख्य आरोपी बनाए गए संजू के सगे भाई कपिल त्रिपाठी समेत सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष अदालत में आरोपियों के खिलाफ हत्या की साजिश और वारदात में उनकी संलिप्तता को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। बचाव पक्ष के वकील के अनुस्सर पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्य आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
पारिवारिक संपत्ति विवाद को पुलिस ने बताया था हत्याकांड की वजह

14 दिसंबर 2022 की दोपहर बिलासपुर के सकरी बाइपास पर संजू त्रिपाठी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने उनकी गाड़ी को घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस सनसनीखेज वारदात से प्रदेश की कानून-व्यवस्था में हड़कंप मचा दिया था। शुरुआती जांच में पुलिस ने हत्या के पीछे पारिवारिक संपत्ति विवाद को बड़ी वजह बताया था। पुलिस की जांच के अनुसार संजू त्रिपाठी और उनके भाई कपिल त्रिपाठी के बीच पैतृक संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। दोनों का नाम शहर की विवादित जमीनों के कारोबार से भी जुड़ता रहा था। पुलिस का दावा था कि इसी विवाद के चलते कपिल ने अपने भाई की हत्या की साजिश रची और यूपी के शूटरों को सुपारी देकर बुलाया।
चार गाड़ियों में निकले थे आरोपी, सकरी बाइपास पर घेरकर बरसाई गोलियां
पुलिस ने अपनी जांच में वारदात की जो कहानी सामने रखी थी, उसके अनुसार 14 दिसंबर को आरोपी अलग-अलग चार गाड़ियों में कपिल त्रिपाठी के फार्म हाउस से सकरी बाइपास की ओर निकले थे। आरोपियों की योजना संजू त्रिपाठी की गाड़ी को रोककर उन पर हमला करने की थी। शूटर दानिश अंसारी, पप्पू दाढ़ी और एजाज उर्फ सोनू हथियारों से लैस होकर एक नीली बलेनो कार में सवार थे। विनय द्विवेदी उर्फ गुरुजी इस कार को चला रहा था। वहीं दूसरी गाड़ी में प्रसीन गुप्ता के साथ भरत तिवारी, आशीष तिवारी और राजेंद्र ठाकुर सवार थे। सकरी बाइपास पर पहुंचने के बाद शूटरों को संजू त्रिपाठी की सफेद रंग की एमजी हेक्टर कार की जानकारी दी गई। इसके बाद उनकी गाड़ी को रोकने की योजना बनाई गई। पुलिस की कहानी के अनुसार जैसे ही संजू की गाड़ी रुकी, हमलावरों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। ड्राइविंग सीट पर बैठे संजू त्रिपाठी पर सबसे पहले दानिश अंसारी ने गोली चलाई। इसके बाद एजाज उर्फ सोनू, पप्पू दाढ़ी और विनय द्विवेदी ने भी फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस का दावा था कि संजू की मौत की पुष्टि होने के बाद आरोपी अलग-अलग गाड़ियों से यूपी की ओर फरार हो गए।
22 लोगों की गिरफ्तारी, लेकिन अदालत में नहीं टिके आरोप
इस हाईप्रोफाइल हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस ने कपिल त्रिपाठी के अलावा उसके पिता जयनारायण त्रिपाठी, पत्नी सुचित्रा त्रिपाठी, मुंहबोली बहन कल्याणी, जीजा भरत तिवारी समेत कई रिश्तेदारों और परिचितों को आरोपी बनाया था। इसके अलावा शूटरों और यूपी से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी की गई थी। पुलिस ने कुल 22 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। जांच एजेंसियों ने संपत्ति विवाद, कथित सुपारी, हथियारों की व्यवस्था और वारदात में अलग-अलग लोगों की भूमिका को जोड़ते हुए हत्या की साजिश का पूरा घटनाक्रम पेश किया था। लेकिन अदालत में अभियोजन पक्ष इन आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर पाया।
चार साल पुराने सनसनीखेज हत्याकांड का चौंकाने वाला अंजाम
शुक्रवार को आए फैसले में अदालत ने मुख्य आरोपी कपिल त्रिपाठी सहित सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया। बचाव पक्ष के वकील ने फैसले के बाद कहा कि पुलिस हत्या की साजिश और आरोपियों की भूमिका साबित करने में असफल रही। अभियोजन की ओर से ऐसे पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके, जिनके आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया जा सके।
