बिलासपुर में बिजली का 'करंट': रोज 10 से 20 बार ट्रिपिंग, सिरगिट्टी-सिलपहरी के 200 उद्योग बेहाल, लाखों का कच्चा माल हो रहा कबाड़

बिलासपुर में बिजली का 'करंट': रोज 10 से 20 बार ट्रिपिंग, सिरगिट्टी-सिलपहरी के 200 उद्योग बेहाल, लाखों का कच्चा माल हो रहा कबाड़

बिलासपुर. जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में इन दिनों बिजली विभाग ने उद्योगपतियों की नींद उड़ा रखी है। सिरगिट्टी (सेक्टर ए और बी), तिफरा और सिलपहरी जैसे बड़े इंडस्ट्रियल एरिया में रोजाना 10 से 20 बार बिजली गुल हो रही है। बिना सूचना के अचानक बिजली कटने से करोड़ों की मशीनें झटके से बंद हो जाती हैं। नतीजा यह है कि प्रोसेस में लगा कच्चा माल तुरंत खराब हो जाता है। उद्योगपतियों को रोज लाखों का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन बिजली विभाग के जिम्मेदार अफसर इससे पूरी तरह अनजान बने बैठे हैं।

 

अफसरों के सामने वॉट्सऐप पर मांगते रहे मदद, नहीं पहुंचा स्टाफ

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हालात कितने खराब हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिजली विभाग और 250 उद्योगपतियों का एक साझा वॉट्सऐप ग्रुप बना है। ग्रुप में शिकायतें तो आती हैं, लेकिन समाधान नहीं होता। बीते दिनों सुबह 8.30 बजे एक उद्योगपति बीके गुप्ता ने सेक्टर-बी की बिजली बंद होने की शिकायत की। 10.20 पर उन्होंने फिर मैसेज किया। 10.41 पर साईंबाबा पैकिंग सेंटर ने डीओ कटने पर स्टाफ मांगा, लेकिन 11.18 बज गए, कोई लाइनमैन मौके पर नहीं पहुंचा। हद तो तब हो गई जब दोपहर 2 से 3 बजे तक पूरा फीडर ही बंद रहा और अमला नदारद रहा।

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मशीनों में जम रहा प्लास्टिक, दाल हो रही खराब

इस आंख-मिचौली का सीधा असर उत्पादन पर है। दाल मिल संचालक व जिला उद्योग संघ के कोषाध्यक्ष राम सुखीजा बताते हैं कि दाल प्रोसेस होते समय बिजली जाते ही मशीनें जाम हो जाती हैं। अंदर फंसा माल दोबारा उपयोग के लायक नहीं बचता। उद्योगपति विजय अरोरा के मुताबिक बारिश शुरू होने के बाद से यह समस्या लगातार बनी हुई है। बिजली बंद होने पर मजदूर खाली बैठे रहते हैं, लेकिन उन्हें दिहाड़ी तो देनी ही पड़ती है। प्लास्टिक इंडस्ट्री में मशीन ठंडी होने से प्लास्टिक अंदर ही जम जाता है। फैब्रिकेशन में वेल्डिंग-कटिंग रुक जाती है और कोल्ड स्टोरेज में तापमान बिगड़ रहा है।

पूरे प्रदेश में सबसे खराब हालात यहीं

जिला उद्योग संघ के सचिव शरद सक्सेना का कहना हैं, "पूरे प्रदेश में शायद ही किसी इंडस्ट्रियल एरिया में इतनी ट्रिपिंग होती होगी। हम सबसे ज्यादा रेवेन्यू देते हैं, फिर भी नई टीम के आने के बाद लापरवाही और बढ़ गई है।" वहीं, उद्योगपति हरीश केडिया बताते हैं कि सिरगिट्टी में 33 केवी के 30-40 और 11 केवी के करीब 150 उपभोक्ता हैं। शिकायत करने पर स्टाफ की कमी का हवाला दे दिया जाता है और ट्रांसफार्मर फुंक जाए, तो बदलने में तीन-तीन दिन लग जाते हैं।

सीएसईबी का दावा- अब अलग हुई टीम, नहीं होगी देरी

इस पूरे मामले में सीएसईबी के चीफ इंजीनियर एके अंबस्ट ने नया दावा किया है। उनका कहना है कि पहले औद्योगिक क्षेत्र के अमले पर आसपास के ग्रामीण इलाकों का भी जिम्मा था। स्टाफ गांव में फॉल्ट सुधारने जाता था, तो लौटने में तीन घंटे लग जाते थे। अब उद्योगपतियों की मांग पर इंडस्ट्रियल एरिया की टीम को ग्रामीण प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। गांवों की बिजली अब चकरभाठा का स्टाफ देखेगा। दावा है कि इससे औद्योगिक क्षेत्रों में फॉल्ट आते ही तुरंत सुधार हो सकेगा।

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