राष्ट्रीय जगत विजन की खबर का असर 42 लाख के मेडिकल घोटाले में ईओडब्ल्यू और एसीबी का एक्शन भ्रष्ट अफसर के दस्तावेज जब्त

राष्ट्रीय जगत विजन की खबर का असर 42 लाख के मेडिकल घोटाले में ईओडब्ल्यू और एसीबी का एक्शन भ्रष्ट अफसर के दस्तावेज जब्त

रायपुर। जगदलपुर में 42 लाख रुपए के मेडिकल बिल घोटाले में आखिरकार एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू ने कड़ा एक्शन ले लिया है। राष्ट्रीय जगत विजन की खबर का यह बड़ा असर हुआ है। जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता वेदप्रकाश पांडेय के खिलाफ जांच एजेंसियों का शिकंजा पूरी तरह से कस गया है। ईओडब्ल्यू और एसीबी के संज्ञान लेने के बाद जगदलपुर डीएसपी ध्रुव ने अफसर के मेडिकल बिल से जुड़े सारे दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। अफसर की सर्विस बुक भी कब्जे में ले ली गई है। यह सख्त कदम इस बड़े घोटाले की परतें खोलने के लिए उठाया गया है।

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ जांच एजेंसियां इस फर्जीवाड़े पर एक्शन ले रही हैं वहीं अफसर का अपना विभाग गूंगा और बहरा बना बैठा है। विभाग के आला अधिकारी ऐसे खामोश हैं जैसे उन्हें सांप सूंघ गया हो। विभाग पूरी तरह से मृत प्राय नजर आ रहा है। सुशासन का दावा करने वाली सरकार में ऐसे दागी और भ्रष्ट अधिकारी को इतने महत्वपूर्ण पद पर कैसे बिठाकर रखा गया है यह एक बहुत बड़ा सवाल है। आम जनता और ईमानदार अधिकारी भी इस चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं।

यह पूरा मामला सीधे तौर पर सरकारी खजाने में सेंधमारी और सरेआम लूट का है। जल संसाधन विभाग में तैनात अफसर वेदप्रकाश पांडेय ने अपने ही माता पिता को फर्जी तरीके से खुद पर आश्रित बताया। इस काम के लिए बाकायदा एक झूठा शपथ पत्र तैयार किया गया। इसके बाद मुंबई के सबसे महंगे ब्रीच कैंडी अस्पताल के 42 लाख रुपए से ज्यादा के फर्जी बिल बनाए गए। इन बिलों को बिना किसी डर के सरकारी खाते से पास करवा लिया गया। यह सब तब किया गया जब इस अफसर के पिता खुद मध्य प्रदेश सरकार के रिटायर्ड अधिकारी हैं और अच्छी खासी पेंशन पा रहे हैं।

Read More अपराधों पर कड़ी कार्रवाई का सम्मान, बिलासपुर पुलिस के खाते में आए दो राज्य स्तरीय पुरस्कार

अफसर के पिता गोवर्धन प्रसाद पांडेय मध्य प्रदेश वन विभाग से रिटायर्ड कार्यालय अधीक्षक हैं। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार से हर महीने करीब 40 हजार रुपए की पेंशन मिलती है। बात सिर्फ पेंशन तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के रीवा में उनका अपना निजी पक्का मकान है। इसके अलावा मड़वा गांव में 10 एकड़ खेती की उपजाऊ जमीन भी उनके नाम पर है। यह पूरी तरह से साफ है कि माता पिता आर्थिक रूप से अपने अफसर बेटे पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं थे। केंद्र और राज्य सरकार के साफ नियम हैं कि माता पिता की मासिक आय 9 हजार रुपए से कम हो तभी उन्हें आश्रित माना जा सकता है। उनका बेटे के साथ रहना भी जरूरी है। लेकिन इस लालची अफसर ने सरकारी पैसा हड़पने के लिए सारे नियमों की धज्जियां उड़ा दीं।

Read More रायपुर में 3 साल तक नाबालिग का पिता ने किया शोषण, दो बार गर्भवती… दूसरी बार फर्जी दस्तावेज से पहुंचाया अस्पताल, नवजात बेचने का आरोप, 6 गिरफ्तार

घोटाले की पटकथा बहुत चालाकी से लिखी गई। अफसर ने अपनी नौकरी के 16 साल पूरे होने के बाद अचानक 20 जुलाई 2025 को पुरानी तारीख से माता पिता को आश्रित बना लिया। इसके जरिए जुलाई से नवंबर 2025 के बीच कुल 42 लाख 16 हजार रुपए के मेडिकल बिल पास कराए गए। इसमें माता स्वर्गीय सुशीला पांडेय के इलाज के नाम पर लगभग 33 लाख रुपए सरकारी खजाने से निकाले गए। यह बिल 9 जुलाई से 20 जुलाई 2025 तक के दिखाए गए। माता का निधन 21 जुलाई को ही हो गया था। इसके ठीक बाद पिता के इलाज के नाम पर भी 9 लाख 26 हजार रुपए के बिल पास करा लिए गए। यह बिल 5 से 9 सितंबर 2025 के बीच के हैं। कार्यालय के रजिस्टर में इन बिलों को सरकारी आदेश निकालकर बिना किसी जांच के मंजूर भी कर लिया गया।

इस महाघोटाले में नियमों को ताक पर रखने की सारी हदें पार कर दी गईं। शिकायतकर्ता ने साफ बताया है कि राज्य के बाहर इलाज कराने पर एक मामले में अधिकतम 30 हजार रुपए ही मिलते हैं। लेकिन यहां लाखों रुपए पास कर दिए गए। दूसरी बड़ी बात यह है कि मुंबई का ब्रीच कैंडी अस्पताल छत्तीसगढ़ सरकार के मान्यता प्राप्त अस्पतालों की सूची में शामिल ही नहीं है। ऐसे में वहां का बिल पास होना विभाग के अन्य अधिकारियों की मिलीभगत की तरफ भी सीधा इशारा करता है। अफसर के माता पिता मध्य प्रदेश के पेंशनर हैं इसलिए वह छत्तीसगढ़ राज्य की चिकित्सा सुविधा के हकदार ही नहीं थे। मेडिकल क्लेम मध्य प्रदेश सरकार से लिया जाना चाहिए था।

फर्जी शपथ पत्र देकर सरकारी खजाने को चूना लगाने का यह खेल अब सबके सामने आ चुका है। अब इस पूरे मामले की शिकायत राज्य शासन और वित्त विभाग के उच्च अधिकारियों से कर दी गई है। शिकायतकर्ता ने साफ मांग की है कि इस घोटाले की तुरंत और निष्पक्ष जांच हो। जो 42 लाख रुपए सरकारी खजाने से लूटे गए हैं उनकी पूरी वसूली इस अफसर से की जाए। इसके साथ ही फर्जीवाड़ा करने और सरकारी नियमों को तोड़ने के जुर्म में वेदप्रकाश पांडेय को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त किया जाए। फिलहाल जांच एजेंसियों की कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है और जल्द ही इस मामले में कई बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद है।

Error on ReusableComponentWidget
Tags:

Latest News

किसानों के विरोध के बीच अमाली की कोलवॉशरी को NOC की तैयारी, 20 गांवों पर असर का दावा; हाईकोर्ट जाएंगे किसान किसानों के विरोध के बीच अमाली की कोलवॉशरी को NOC की तैयारी, 20 गांवों पर असर का दावा; हाईकोर्ट जाएंगे किसान
ईडी की कार्रवाई से फिर गरमाया शराब-कस्टम मिलिंग मामला, रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों पर छापे इधर भाजपा कनेक्शन की भी चर्चा 
घर का सपना दिखाकर बिल्डरों ने की 11 करोड़ की ठगी, 50 डिफाल्टर बिल्डरों पर कार्यवाही का इंतजार
सुबह खाली पेट पानी पीना कितना फायदेमंद? जानें क्या है सच और किन बातों का रखें ध्यान
मध्यस्थता केंद्र में ही भड़का विवाद, तलाक की बात पर पत्नी ने दूसरी शादी का आरोप लगाया तो भड़का हवलदार, काउंसलरों के सामने ही की मारपीट
हिसार कोर्ट के बाहर गैंगस्टर की हत्या! पेशी से निकलते ही बाइक सवार बदमाशों ने बरसाईं गोलियां, 14 राउंड फायरिंग
कभी अफसर बने, कभी ‘पर्यटक’... 15 हजार KM तक पीछा कर ड्रग तस्करों को दबोचा, यूट्यूबर समेत कई गिरफ्तार
बलरामपुर में मासूम की मौत से मचा हड़कंप! इलाज के बाद 3 साल के बच्चे की मौत, झोलाछाप डॉक्टर पर गंभीर सवाल
जरहाभाठा छात्रावास में बनेगी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, पीपीपी मॉडल से होगा निर्माण
पेंड्रा में जहरीले सांप के साथ खतरनाक करतब! नशे में युवक ने गले में लपेटकर कराया डंसने का प्रयास, अस्पताल पहुंचते ही भागा
प्रार्थी के पैसे से फ्लाइट यात्रा, आईजी की बड़ी कार्रवाई, थाना प्रभारी समेत 8 पुलिसकर्मी निलंबित
‘नीर, नारी, निधि’ पुस्तक का विमोचन, मुख्यमंत्री साय ने किया विमोचन, जल संरक्षण की उपलब्धियां दर्ज