प्रमोशन का खेल: नियमों को ताक पर रख जूनियर बने अधिकारी, सीनियर प्रोफेसर ACR के फेर में लगा रहे दफ्तरों के चक्कर

प्रमोशन का खेल: नियमों को ताक पर रख जूनियर बने अधिकारी, सीनियर प्रोफेसर ACR के फेर में लगा रहे दफ्तरों के चक्कर

रायपुर | प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में प्राध्यापकों की पदोन्नति प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई है। विभाग पर आरोप लग रहे हैं कि अफसरों को प्रमोशन देने में अलग-अलग पैमाने अपनाए जा रहे हैं। विभागीय लापरवाही के कारण जिन प्राध्यापकों की गोपनीय चरित्रावली (ACR) नहीं मिल पाई, उन्हें योग्य होने के बावजूद पदोन्नति की सूची से बाहर कर दिया गया। वहीं, दूसरी ओर जिन जूनियर और अपात्र लोगों को रोका जाना था, उन्हें नियमों में ढील देते हुए ऊंचे पदों पर बैठा दिया गया। अब एक बार फिर अगस्त में स्नातक प्राचार्य के 292 पदों के लिए डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) की बैठक होनी प्रस्तावित है, जिसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

यूं हाशिए पर धकेल दिए गए योग्य दावेदार

विभाग की कार्यप्रणाली के चलते ऐसी स्थिति बन गई है कि जूनियर अधिकारी प्रमोशन पाकर अपने सीनियर्स के बॉस बन गए हैं।

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 सीनियरों की हुई अनदेखी:

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 साल 2016 की पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान कुल 792 दावेदार थे, लेकिन विभाग ने सिर्फ 26 को ही प्रमोशन का लाभ दिया। बाकी 766 प्राध्यापक मायूस रह गए। इसके कुछ सालों बाद 29 मई 2025 को जारी हुई सूची में 302 लोगों को प्रमोट किया गया। वर्तमान में स्थिति यह है कि 2016 में प्रमोशन पाने वाले कई अधिकारी आज प्राचार्य, संयुक्त संचालक और अतिरिक्त संचालक जैसे मलाईदार पदों पर काबिज हैं, जबकि उनसे वरिष्ठ लोग आज भी निचले पदों पर काम कर रहे हैं।

 छुट्टी वालों की वरिष्ठता बरकरार:

पदोन्नति प्रक्रिया में एक और खामी यह रही कि जो लोग अवैतनिक अवकाश (बिना वेतन की छुट्टी) पर थे, उनकी वरिष्ठता को भी कायम रखा गया। इसका नुकसान नियमित रूप से काम कर रहे सीनियर प्राध्यापकों को उठाना पड़ा और वे प्रमोशन की दौड़ में पिछड़ गए।

 

कोर्ट और जीएडी के नियमों की भी परवाह नहीं

इस मामले में विभाग ने न्यायालय और सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के दिशा-निर्देशों को भी नजरअंदाज कर दिया। 4 मई 2026 को डॉ. मीना क्षेत्रपाल मामले में हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि अगर विभाग की गलती या लापरवाही से एसीआर गुम होती है, और संबंधित कर्मचारी को इसकी सूचना नहीं दी जाती है, तो ऐसे में उसका प्रमोशन नहीं रोका जाएगा।

इसी तरह, जीएडी ने 16 दिसंबर 2010 को एक परिपत्र जारी कर कहा था कि कर्मचारी की सीआर में लिखी जाने वाली हर टिप्पणी से उसे अवगत कराना जरूरी है। लेकिन इन सबके बावजूद, उच्च शिक्षा विभाग ने सिर्फ प्रतिहस्ताक्षर (काउंटर सिग्नेचर) न होने का तर्क देकर कई योग्य दावेदारों की फाइल अटका दी।

नियमों के तहत होगा विचार

आगामी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उच्च शिक्षा विभाग की आयुक्त रीता यादव का कहना है कि स्नातक प्राचार्य के लिए डीपीसी का प्रस्ताव आयोग के पास भेज दिया गया है। अगस्त के महीने में यह बैठक होने की उम्मीद है। आयुक्त ने आश्वस्त किया है कि प्रमोशन प्रक्रिया में सभी पात्र दावेदारों के नामों पर नियम अनुसार ही विचार किया जाएगा।

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