Pendra News: केंदा घाटी के अंधे मोड़ पर दो भारी वाहन दुर्घटनाग्रस्त, खाई में लटका ट्रक और पलटा ट्रेलर
पेंड्रा। निर्माणाधीन नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए केंदा घाटी का एक खतरनाक मोड़ चिंता का कारण बना हुआ है। पेंड्रा-बिलासपुर मुख्य मार्ग पर यहां दो भारी वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गए। एक ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में लटक गया, जबकि एक लोड ट्रेलर नीचे पलट गया। दोनों वाहनों को हटाने के लिए जेसीबी की मदद लेनी पड़ी और काफी देर तक मशक्कत करनी पड़ी।
एक ट्रक खाई में अटका, दूसरा वाहन नीचे पलटा
मिली जानकारी के अनुसार, केंदा घाटी के अंधे मोड़ पर वाहन चालकों के सामने उस समय मुश्किल स्थिति बन गई, जब एक ट्रक सड़क से नीचे उतरकर खाई में लटक गया। इसी दौरान एक लोड ट्रेलर भी अनियंत्रित होकर नीचे पलट गया। दोनों वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने से मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
हादसे के बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को निकालने के लिए जेसीबी की सहायता ली गई। भारी वाहनों को हटाने में काफी समय लगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी के घायल होने या हताहत होने की पुष्टि नहीं की गई है।
निर्माणाधीन हाईवे पर संभलकर निकल रहे वाहन चालक
घटना के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी। केंदा घाटी के इस मोड़ पर दृश्यता और सड़क की स्थिति को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस हिस्से में दुर्घटनाओं की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
निर्माणाधीन सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही के बीच सुरक्षित यातायात व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे में वाहन चालकों को मोड़ के पास गति नियंत्रित रखने और पर्याप्त दूरी बनाकर चलने की जरूरत है।
चेतावनी संकेतक और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
लगातार हादसों की खबरों के बीच केंदा घाटी के खतरनाक मोड़ पर सड़क सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। निर्माणाधीन मार्ग पर पर्याप्त चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर, बैरिकेडिंग और अन्य जरूरी सुरक्षा उपाय प्रभावी हैं या नहीं, इसकी जांच महत्वपूर्ण है।
स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार विभागों और नेशनल हाईवे से जुड़े अधिकारियों से प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा की जा रही है। हालांकि, इस घटना को लेकर संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है।
हादसों पर रोक लगाने के लिए जरूरी है ठोस पहल
केंदा घाटी में हुई यह घटना निर्माणाधीन हाईवे पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की चुनौती को सामने लाती है। खतरनाक मोड़ों की पहचान कर वहां आवश्यक संकेतक और सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त करना जरूरी है, ताकि वाहन चालकों को समय रहते खतरे का अंदाजा हो सके।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर क्या कदम उठाते हैं। समय रहते प्रभावी उपाय किए जाने से भविष्य में संभावित दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
