राजधानी के 4 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रामभरोसे चल रहीं सर्जरी: ऑपरेशन के दौरान खून की जरूरत पड़े तो रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं
रायपुर |राजधानी रायपुर की आबादी जिस तेजी से बढ़ रही है, उस गति से स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार अब भी अधूरा ही नजर आता है। आज भी शहर के चार प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। बिरगांव, गुढ़ियारी, खोखोपारा और आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में स्थित इन केंद्रों पर शहर के करीब छह लाख लोगों की प्राथमिक और आपातकालीन चिकित्सा जरूरतों का पूरा भार है। यहां नियमित रूप से प्रसूति और परिवार नियोजन जैसे ऑपरेशन तो किए जा रहे हैं, लेकिन किसी भी आपात स्थिति से निपटने की जरूरी व्यवस्थाएं पूरी तरह नदारद हैं। इसी कारण कई बार सामान्य माने जाने वाले ऑपरेशन भी एक बड़ी चुनौती बन जाते हैं।
रेफर करने की मजबूरी जान का भी जोखिम
इन स्वास्थ्य केंद्रों में लगातार संस्थागत प्रसव और सर्जरी हो रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यदि ऑपरेशन टेबल पर मरीज को अचानक रक्त की आवश्यकता पड़ जाए, तो इन केंद्रों के पास इसे तत्काल उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था नहीं है। ब्लड स्टोरेज की सुविधा न होने के कारण, गंभीर स्थिति में मरीज को मेकाहारा या किसी अन्य बड़े अस्पताल में रेफर करना ही एकमात्र विकल्प बचता है। रेफर करने की इस प्रक्रिया में उपचार में देरी का जोखिम रहता है और मरीज की जान जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन केंद्रों की भूमिका अब केवल ओपीडी तक सीमित नहीं रह गई है। जिस अनुपात में इन केंद्रों पर सर्जरी की संख्या बढ़ी है, उसी अनुपात में संसाधनों को विकसित करना अनिवार्य है। वर्तमान में इन स्वास्थ्य केंद्रों को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिन चीजों की सबसे अधिक आवश्यकता है, उनका भारी अभाव है:
ब्लड स्टोरेज यूनिट: ऑपरेशन के दौरान अगर अचानक खून की जरूरत पड़े, तो तत्काल रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था अस्पताल में नहीं है।
प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ किसी भी गंभीर और आपातकालीन स्थिति को सुरक्षित ढंग से संभालने के लिए दक्ष कर्मचारियों की तैनाती पूरी नहीं है।
जीवन रक्षक उपकरण: आपात स्थिति में मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे स्थिर रखने और जान बचाने वाले आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं हैं।
अनहोनी का इंतजार कर रहा स्वास्थ्य विभाग?
चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया है कि ब्लड बैंक, प्रशिक्षित स्टाफ और आपातकालीन उपकरण जैसी सुविधाएं अब अस्पतालों के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं हैं, बल्कि यह बुनियादी आवश्यकता बन चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग को किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किए बिना इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को जल्द से जल्द सर्वसुविधायुक्त बनाना चाहिए। जब तक इन केंद्रों में आपातकालीन व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं होंगी, तब तक मरीजों को सुरक्षित इलाज का भरोसा नहीं दिया जा सकता और बड़े अस्पतालों पर भी रेफरल मरीजों का अनावश्यक बोझ बढ़ता रहेगा।
