सरकारी दफ्तर भी अब ‘पहले रिचार्ज, फिर बिजली’! 3,432 करोड़ के बकाए पर सरकार का बड़ा फैसला, चार किस्तों में होगी वसूली
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली बिल के बढ़ते सरकारी बकाए पर अब सरकार ने सख्त व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली है। सरकारी विभागों में बिजली की खपत पहले और भुगतान बाद में करने की पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए अब ‘पहले भुगतान, फिर बिजली’ यानी प्री-पेड सिस्टम लागू किया जाएगा। सरकार की योजना के मुताबिक, शासकीय बिजली कनेक्शनों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट मीटर आधारित प्री-पेड बिलिंग से जोड़ा जाएगा। पहले चरण में अगस्त 2026 से विकासखंड स्तर और उससे ऊपर के सरकारी कार्यालय इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे। सबसे बड़ी वजह सरकारी विभागों पर जमा होता भारी बिजली बिल है। जून 2026 तक सरकारी बिजली बकाया करीब 3,432.64 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
3,432 करोड़ का बकाया, अब सरकार ने कसी कमर
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक सरकारी विभागों पर करीब 2,883.42 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया था। इसके बाद जून तक की अनुमानित बिजली खपत जोड़ने पर यह रकम बढ़कर करीब 3,432.64 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। बढ़ते बकाए को देखते हुए सरकार ने भुगतान व्यवस्था में बदलाव का फैसला लिया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य में बिजली बिल जमा होने की समस्या को रोकना है।
30 जून तक का पुराना बकाया चार किस्तों में
प्री-पेड मीटर लगने के बाद भी पुराने बिजली बिल माफ नहीं होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 30 जून 2026 तक की बकाया राशि का भुगतान चार समान किस्तों में किया जाएगा। किस्तों का भुगतान इस तरह किया जाना है
- जुलाई-सितंबर 2026
- अक्टूबर-दिसंबर 2026
- जनवरी-मार्च 2027
- अप्रैल-जून 2027
यानी सरकारी विभागों को पुराने बकाए का भुगतान एकमुश्त करने के बजाय चार तिमाहियों में करने की सुविधा दी गई है।
राज्य में 1.65 लाख से ज्यादा सरकारी कनेक्शन
31 मई 2026 तक राज्य में 1,65,727 शासकीय बिजली कनेक्शन दर्ज हैं। इनमें से करीब 1,43,800 कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। पहले चरण में विकासखंड स्तर और उससे ऊपर के करीब 22,741 सरकारी कनेक्शनों को प्री-पेड बिलिंग व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।
अब सरकारी दफ्तरों में भी ‘रिचार्ज खत्म तो बिजली संकट’
अब तक सरकारी कार्यालय बिजली का इस्तेमाल करते थे और बाद में बिल भुगतान की प्रक्रिया होती थी। भुगतान में देरी होने पर बकाया लगातार बढ़ता गया।प्री-पेड व्यवस्था में संबंधित विभाग को पहले निर्धारित राशि रिचार्ज करनी होगी। उपलब्ध बैलेंस के आधार पर बिजली का इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे बिजली की खपत और खर्च दोनों पर विभागों की निगरानी बढ़ेगी।
पानी, स्ट्रीट लाइट और सफाई सेवाओं पर असर नहीं होना चाहिए
सरकार ने यह भी साफ किया है कि भुगतान या रिचार्ज से जुड़ी किसी समस्या का असर पेयजल आपूर्ति, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता और दूसरी जरूरी नागरिक सेवाओं पर नहीं पड़ना चाहिए। किसी तकनीकी या भुगतान संबंधी परेशानी की स्थिति में संबंधित नोडल अधिकारी को CSPDCL के साथ तत्काल समन्वय कर समस्या दूर करनी होगी।
हर महीने सरकार को देना होगा बिजली का हिसाब
नई व्यवस्था में सिर्फ रिचार्ज करना ही पर्याप्त नहीं होगा। नगरीय निकायों को हर महीने बिजली कनेक्शनों और भुगतान की स्थिति की रिपोर्ट भी देनी होगी। हर महीने की 5 तारीख तक रिपोर्ट में कनेक्शनों की संख्या, प्री-पेड ग्रुप ID, बकाया, भुगतान, रिचार्ज और उपलब्ध बैलेंस जैसी जानकारी देनी होगी। लापरवाही के कारण यदि किसी जरूरी नागरिक सेवा की बिजली प्रभावित होती है तो संबंधित नगरीय निकाय की जवाबदेही तय की जाएगी।
तिमाही खर्च का पैसा पहले रखना होगा
सरकार ने नगरीय निकायों को निर्देश दिया है कि आगामी तिमाही में अनुमानित बिजली खपत के हिसाब से पहले से पर्याप्त प्री-पेड बैलेंस रखा जाए। इसका मकसद यह है कि अचानक रिचार्ज खत्म होने से किसी सरकारी सेवा की बिजली बाधित न हो। हर कनेक्शन का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा, जिसमें BP नंबर, ग्रुप ID, बकाया, भुगतान और मौजूदा बैलेंस जैसी जानकारी दर्ज रहेगी।
हर निकाय में होगा नोडल अधिकारी
नई प्रणाली को जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को दी गई है। प्रत्येक निकाय को अपने सरकारी कनेक्शनों का सत्यापन कर उन्हें निर्धारित प्री-पेड ग्रुप में शामिल करना होगा। इसके लिए एक प्री-पेड नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो रिचार्ज, भुगतान और कनेक्शन की निगरानी करेगा।
सरकारी बिजली बिल पर अब नहीं चलेगी ‘पहले खर्च, बाद में भुगतान’ की व्यवस्था
3,432 करोड़ रुपये से ज्यादा के अनुमानित बकाए ने सरकार को भुगतान व्यवस्था बदलने पर मजबूर किया है। अब सरकारी विभागों के लिए बिजली इस्तेमाल का तरीका भी आम उपभोक्ताओं की तरह ज्यादा अनुशासित होगा, पहले रिचार्ज, फिर खपत। वहीं पुराने बकाए की चार किस्तों में वसूली से बिजली वितरण कंपनी के लंबित भुगतान का बोझ कम करने की कोशिश की जा रही है।
