छत्तीसगढ़ में 3 एक्स-कैडर डीजी पदों के प्रस्ताव पर विवाद, PMO से हस्तक्षेप की मांग; इधर बिना केंद्र की मंजूरी मिले प्रमोशन देने की तैयारी!

छत्तीसगढ़ में 3 एक्स-कैडर डीजी पदों के प्रस्ताव पर विवाद, PMO से हस्तक्षेप की मांग; इधर बिना केंद्र की मंजूरी मिले प्रमोशन देने की तैयारी!

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में तीन नए एक्स-कैडर महानिदेशक (डीजी) पदों के गठन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रायपुर के एक भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में दखल देने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि राज्य कैबिनेट में इस प्रस्ताव को लाने से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह नियमों का खुला उल्लंघन होगा।

1994 से 1996 बैच के अफसरों को लाभ देने की तैयारी

पत्र में वर्णित है कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक छत्तीसगढ़ सरकार का गृह विभाग 1994, 1995 और 1996 बैच के तीन आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नति देने के विचार में है। इसी वजह से तीन नए एक्स-कैडर डीजी पद बनाने का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखे जाने की चर्चा है। भाजपा नेता ने PMO को लिखे पत्र में कहा कि भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियम 1954 और (वेतन) नियम 2016 के तहत कैडर की संख्या या संरचना तय करने का अधिकार भारत सरकार के पास सुरक्षित है। राज्य सरकार अपनी मर्जी से डीजी लेवल के ऊंचे पदों का सृजन नहीं कर सकती।

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नक्सलवाद कम हुआ तो नए पदों की क्या जरूरत?

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शिकायतकर्ता ने बताया है कि 21 मई 2025 को ही केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ आईपीएस कैडर की समीक्षा करके इसकी संरचना बढ़ाई थी। उस समय राज्य की तरफ से इन अतिरिक्त पदों की कोई मांग नहीं की गई। दूसरी ओर सरकार खुद कई मंचों पर कह चुकी है कि राज्य में माओवादी घटनाओं पर काफी हद तक लगाम लग चुकी है और नक्सलवाद का खतरा कम हुआ है। ऐसे हालात में अचानक पुलिस प्रशासन के सबसे ऊपरी लेवल पर तीन अतिरिक्त पदों की जरूरत क्यों पड़ गई? प्रशासन को नए पद बनाने के बजाय पुराने पदों की उपयोगिता की समीक्षा करनी चाहिए।

2018 में भी हुई थी ऐसी कोशिश, हाई कोर्ट ने माना था गलत

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में  पुराने मामलों का भी जिक्र किया गया  है। उनके अनुसार 6 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन सरकार ने बिना गृह मंत्रालय की अनुमति के तीन एक्स-कैडर पद मंजूर कर लिए थे और अधिकारियों को प्रमोशन भी दे दिया था। इस दौरान तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री ने इन पदों को अस्थायी मंजूरी देने से भी मना कर दिया था। उनका तर्क था कि इस व्यवस्था से पुलिस का ढांचा ऊपरी स्तर पर बहुत भारी (टॉप-हेवी) हो जाएगा।

नतीजतन, 26 सितंबर 2019 को राज्य सरकार को अपना वह आदेश रद्द करना पड़ा। इस निरस्तीकरण के खिलाफ हाई कोर्ट में डब्ल्यूपीएस 4595/2022 दायर की गई थी। लेकिन छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी निरस्तीकरण को सही ठहराया। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि कैडर नियंत्रक प्राधिकारी यानी केंद्र सरकार की अनुमति के बिना ऐसे पद नहीं बनाए जा सकते।

नियमों का दिया हवाला, मुख्य सचिव को निर्देश देने की अपील...

गुप्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे पत्र में भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) के नियम 4 और 8 का विशेष रूप से वर्णन है। नियम बताते हैं कि कैडर अधिकारियों को तय संख्या से ज्यादा पदों पर नियुक्त करने से पहले केंद्र की अनुमति लेना जरूरी है। वहीं आईपीएस (वेतन) नियम 2016 के नियम 12(7) और 3(2)(ii) का हवाला देते हुए बताया गया है कि लेवल-16 का वेतन पाने वाले अफसरों की संख्या भी निर्धारित सीमा को पार नहीं कर सकती। बिना पूर्व सहमति के की गई कोई भी नियुक्ति रद्द करने योग्य मानी जाएगी।

भाजपा नेता ने पीएमओ से अपील की है कि वे छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को निर्देश जारी करें कि तीन एक्स-कैडर डीजी पदों का कोई भी प्रस्ताव कैबिनेट के सामने पेश न करें, जब तक कि गृह मंत्रालय से पूर्व स्वीकृति न मिल जाए। जो निर्णय पहले ही कोर्ट में गलत साबित हो चुका है, उसे दोहराने से कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें बढ़ेगी । उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। 

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