जेजेएम की सुस्त चाल और अफसरों की लेटलतीफी पर डिप्टी सीएम सख्त, 4 अधिकारियों को शोकॉज नोटिस
बिलासपुर । जिले में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के कार्यों की धीमी प्रगति और अधिकारियों की लापरवाही शनिवार को हुई समीक्षा बैठक में खुलकर सामने आई। जिले के प्रभारी मंत्री और डिप्टी सीएम अरुण साव की अध्यक्षता में कलेक्टोरेट के मंथन सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक से चार जिम्मेदार अधिकारी नदारद रहे। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए साव ने कलेक्टर से पूछा कि इन अफसरों को डिप्टी सीएम की मीटिंग से ज्यादा जरूरी कौन सा काम आ गया? उन्होंने तत्काल बिल्हा, तखतपुर, कोटा के जनपद सीईओ और रतनपुर नगर पालिका के सीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
594 योजनाएं अधूरी, मार्च 2027 तक का अल्टीमेटम
जिले के 804 गांवों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य है, लेकिन मैदानी स्तर पर काम की रफ्तार काफी धीमी है। जिले में अभी 594 योजनाओं का काम अधूरा पड़ा है। पीएचई के कार्यपालन अभियंता (ईई) रुपेश धनंजय ने बैठक में बताया कि केवल 310 योजनाएं पूरी हो सकी हैं, जिनमें से 219 पंचायतों को हैंडओवर की गई हैं। पंचायतें इन योजनाओं का संचालन कैसे कर रही हैं, इसकी जानकारी देने के लिए बिल्हा जनपद सीईओ कुमार लहरे, तखतपुर सीईओ सत्यव्रत तिवारी, कोटा सीईओ युवराज सिन्हा और रतनपुर सीएमओ सुखसागर खुटे बैठक में उपस्थित ही नहीं थे। जनपद पंचायत अध्यक्षों ने शिकायत की कि सीईओ योजना के पूरा होने की जानकारी साझा नहीं करते। मस्तूरी सीईओ भी बैठक में काफी देर से पहुंचे।
ठेकेदारों की सुस्त कार्यप्रणाली पर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने ठेकेदारों को मार्च 2027 तक का समय दिया है। कई गांवों में पानी की टंकियां बन चुकी हैं, लेकिन पाइप लाइन और नल का काम अधूरा होने से सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। एके इंटरप्राइजेस, अंशुल कुमार जैन, अरूण कुमार चौधरी, आर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी, चौधरी एग्री टेक, गनेशा कंस्ट्रक्शन, केएन एसोसिएट्स और उमाशंकर सिंह जैसे ठेकेदारों के काम महुआकापा, करही, अमोलीकापा, कारीछापर, भरनी, बसहा, लाखासार और देवकिरारी सहित कई गांवों में पेंडिंग हैं। समय पर काम पूरा नहीं करने वालों का भुगतान रोकने और एग्रीमेंट निरस्त करने की चेतावनी दी गई है।
खंभे हटाने के नाम पर डेढ़ करोड़ की मांग
बुनियादी ढांचे की समस्याओं पर भी जनप्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने अशोक नगर में सड़क निर्माण के बीच आ रहे बिजली खंभों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इन खंभों को शिफ्ट करने के लिए बिजली कंपनी के अफसर डेढ़ करोड़ रुपए की मांग कर रहे हैं। इसी तरह बिल्हा के बरतोरी-मोहतरा मार्ग पर भी सड़क के बीच बिजली के खंभे खड़े हैं। प्रभारी मंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल को जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। जांच में दोषी पाए जाने वाले बिजली विभाग के अफसरों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जलभराव का निकलेगा स्थाई हल, मल्हार-रतनपुर का बनेगा मास्टर प्लान
जुलाई के मध्य में हुई बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति निर्मित हुई थी। डिप्टी सीएम ने कहा कि पहली बारिश में ही ऐसा होना कार्ययोजना की कमी दर्शाता है। उन्होंने समस्याओं का अस्थाई निदान करने के बजाय ठोस और स्थाई हल निकालने के निर्देश दिए। बारिश थमते ही निर्माण विभाग जर्जर सड़कों की मरम्मत शुरू करेंगे।
पर्यटन और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए मल्हार और रतनपुर के विकास के लिए नया मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इन दोनों ऐतिहासिक नगरों की विरासत और भविष्य की जरूरतों के अनुसार समग्र विकास योजना बनेगी। इसके साथ ही, आईएसडीपी के तहत बने आवासों की मरम्मत कर उन्हें जल्द पात्र गरीब परिवारों को आवंटित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में विधायक धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, दिलीप लहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, महापौर पूजा विधानी, एसएसपी रजनेश सिंह और निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे उपस्थित थे।
