बस्तर में निर्णायक मोड़: 131 जवानों के हत्यारे देवजी ने किया आत्मसमर्पण, संगठन पर आखिरी वार बाकी
रायपुर/बस्तर। नक्सल संगठन को बड़ा झटका देते हुए उसके महासचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने 22 फरवरी को तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। देवजी पर बस्तर में 131 से अधिक जवानों की हत्या का आरोप है और उसे ताड़मेटला व रानीबोदली जैसे बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है। उसके सरेंडर को नक्सली संगठन की कमर टूटने जैसा माना जा रहा है।
65 वर्षीय देवजी तेलंगाना के जगतियाल जिले का निवासी है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बसवा राजू के एनकाउंटर के बाद उसे संगठन का महासचिव बनाया गया था और वर्तमान में वह शीर्ष नेतृत्व की कमान संभाल रहा था। केवल छत्तीसगढ़ में ही उस पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसके साथ माओवादी नेता मल्ला राजी रेड्डी सहित कई नक्सलियों ने भी हथियार डाले हैं।
अब अगला नंबर रमन्ना और बेसरा का?
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि देवजी के बाद यदि मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर और राममन्ना उर्फ गणपति जैसे शीर्ष नेताओं का सरेंडर या एनकाउंटर होता है, तो छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर पहुंच सकता है। सूत्रों के मुताबिक, बस्तर संभाग में अब लगभग 200 सक्रिय नक्सली ही शेष हैं।
कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में KGH-2 अभियान
छत्तीसगढ़ के कर्रेगुट्टा हिल्स में 17 फरवरी से CRPF के नेतृत्व में ‘KGH-2’ ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस संयुक्त अभियान में सुरक्षा बल शेष बचे शीर्ष नक्सली नेताओं की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। अब तक 89 आईईडी बरामद किए जा चुके हैं। राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि बचे हुए नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अंतिम अवसर दिया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति आत्मसमर्पण और पुनर्वास की है, लेकिन हिंसा का रास्ता चुनने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। देवजी के सरेंडर के बाद बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि संगठन का शेष नेतृत्व हथियार डालेगा या सुरक्षा बलों के साथ अंतिम मुठभेड़ का रास्ता चुनेगा।
