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छत्तीसगढ़ की जेलें ओवरफ्लो, रायपुर सेंट्रल जेल में क्षमता से दोगुने कैदी
रायपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे राज्य की जेल व्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। हालात यह हैं कि प्रदेश की सबसे बड़ी रायपुर केंद्रीय जेल में तय क्षमता से दोगुने से भी अधिक कैदी बंद हैं। जेलों में बढ़ती भीड़ के कारण कैदियों के बीच मारपीट, यौन उत्पीड़न और अन्य आपराधिक घटनाओं में भी इजाफा देखा जा रहा है।
प्रदेश में वर्तमान में केंद्रीय, जिला और उपजेलों सहित कुल 33 जेलें संचालित हैं। इन जेलों की कुल आवास क्षमता 14,733 कैदियों की है, जबकि इनमें 18,525 कैदी निरुद्ध हैं। यानी प्रदेश की जेलें औसतन अपनी क्षमता से लगभग 26 प्रतिशत अधिक भरी हुई हैं।
रायपुर सेंट्रल जेल सबसे अधिक प्रभावित
रायपुर केंद्रीय जेल की निर्धारित क्षमता 1,586 कैदियों की है, लेकिन यहां 3,291 कैदी रखे गए हैं, जो क्षमता से दो गुना से भी अधिक है। यही स्थिति बिलासपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा सहित कई अन्य जिलों की जेलों में भी देखने को मिल रही है।
एक साल में 97 आपराधिक घटनाएं दर्ज
जेलों में अत्यधिक भीड़ का असर आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बीते एक वर्ष में प्रदेश की 9 जेलों दुर्ग, अंबिकापुर, रायपुर, बिलासपुर, जिला जेल राजनांदगांव, बैकुंठपुर, राजमानुजगंज, महासमुंद, बलौदाबाजार और सारंगढ़ में कैदियों के बीच मारपीट, यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों के कुल 97 प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
क्षमता बढ़ाने की दिशा में सरकार के कदम
कैदियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार जेलों की अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है।
- भाटापारा और भानुप्रतापुर में 100-100 बंदी क्षमता वाले नवीन जेल भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिनके आधिपत्य की प्रक्रिया जारी है।
- रायपुर के मंदिरहसौद स्थित गोढ़ी में नए जेल निर्माण का निर्णय लिया गया है। इसके लिए लगभग 5 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है और 50 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है।
- बिलासपुर के बैमानगोई में 1,500 कैदी क्षमता वाली विशेष जेल के निर्माण की प्रक्रिया भी जारी है।
- इसके अलावा बेमेतरा जिले के ग्राम पर्थरा में 200 कैदी क्षमता वाली नई जेल का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद प्रदेश की जेलों में कैदियों की आवास क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने और भीड़ की समस्या से कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
