CG News: सुकमा में मेडिकल रिपोर्ट ने बदल दी मरीज की पहचान! उम्र से लेकर लिंग तक गलत दर्ज, मौत के बाद परिवार ने मांगी जांच

CG News: सुकमा में मेडिकल रिपोर्ट ने बदल दी मरीज की पहचान! उम्र से लेकर लिंग तक गलत दर्ज, मौत के बाद परिवार ने मांगी जांच

सुकमा। जिला अस्पताल सुकमा परिसर में संचालित अटल आरोग्य लैब की रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। मामला एक ऐसे मरीज का है, जिसकी जांच रिपोर्ट में उम्र और लिंग जैसी बुनियादी पहचान संबंधी जानकारी ही गलत दर्ज हो गई। परिजनों का आरोप है कि इस गलती के बाद उपचार प्रक्रिया प्रभावित हुई और मरीज की हालत बिगड़ती चली गई। हालांकि, गलत रिपोर्ट और मरीज की मृत्यु के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध था या नहीं, यह स्वतंत्र जांच का विषय है। मामले में परिजनों ने राज्य सरकार से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने और एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देने की मांग की है। शिकायत मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के समक्ष भी रखी गई है।

80 साल के मरीज की रिपोर्ट में उम्र 30 साल दर्ज
मामला सुकमा निवासी स्वर्गीय रानीदान राठी के उपचार से जुड़ा है। परिवार की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, मरीज की वास्तविक उम्र 80 वर्ष थी, लेकिन लैब रिपोर्ट में उम्र 30 वर्ष दर्ज कर दी गई। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में मरीज का लिंग भी पुरुष के बजाय महिला दर्ज होने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक यही गलत जानकारी लैब के Laboratory Information System (LIS) में भी दर्ज दिखाई दे रही थी।

लैब ने माना- पंजीयन के दौरान हुई गलती
मामले में अहम बात यह है कि लैब की ओर से जारी स्पष्टीकरण में मरीज के पंजीयन के दौरान डेटा एंट्री में गलती होने की बात स्वीकार किए जाने का दावा किया गया है। लैब के Root Cause Analysis में भी मरीज पंजीकरण, बारकोड प्रक्रिया तथा पंजीयन से लेकर नमूना संग्रह तक कई स्तरों पर हुई त्रुटियों का उल्लेख किया गया है। यहीं से सवाल उठता है कि मरीज की पहचान संबंधी जानकारी दर्ज करने और नमूना लेने से पहले पर्याप्त सत्यापन क्यों नहीं हुआ। खासकर स्वास्थ्य सेवाओं में उम्र, लिंग और मरीज की पहचान जैसी जानकारियां रिकॉर्ड की बुनियादी कड़ी मानी जाती हैं।

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परिवार का दावा- रिपोर्ट की गलती के बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों का आरोप है कि गलत रिपोर्ट के बाद मरीज की स्वास्थ्य स्थिति लगातार खराब होती गई और बाद में उनका निधन हो गया। परिवार ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, केवल रिपोर्ट में दर्ज गलती के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि उसी कारण मरीज की मृत्यु हुई। परिवार इसी संबंध की स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच चाहता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गलत डेटा या रिपोर्टिंग का उपचार पर कोई वास्तविक प्रभाव पड़ा था या नहीं।

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घटना के बाद लैब ने किए कई सुधारात्मक बदलाव
लैब की ओर से 19 जून 2026 की रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए कई सुधारात्मक कदमों का उल्लेख किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें मरीज के मूल रिकॉर्ड से जानकारी का मिलान, रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा और संबंधित क्लिनिकल यूनिट को सूचना देने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

इसके अलावा double checking, cross verification, barcode verification और double-level report validation जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया है। कर्मचारियों के लिए refresher training और नियमित audit तथा quality assurance review का भी उल्लेख किया गया है। परिवार का सवाल है कि यदि इन अतिरिक्त जांच और सत्यापन प्रक्रियाओं की जरूरत घटना के बाद महसूस हुई, तो पहले मरीज की पहचान संबंधी जानकारी की जांच व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।

23 मई को हुई मरीज की मौत
परिवार के अनुसार, उपचार के दौरान स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने के बाद 23 मई 2026 को रानीदान राठी का निधन हो गया। इसके बाद परिजनों ने पूरे मामले को केवल एक रिकॉर्ड संबंधी गलती नहीं मानते हुए इसकी स्वतंत्र जांच की मांग उठाई। परिवार का कहना है कि उनके लिए यह घटना आर्थिक नुकसान से कहीं ज्यादा गंभीर है और उन्होंने जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
शासन को दिए गए आवेदन में परिजनों ने मरीज से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है। इसमें मेडिकल फाइल, OPD/IPD रिकॉर्ड, प्रिस्क्रिप्शन, लैब रिपोर्ट, LIS डेटा, बारकोड रिकॉर्ड और उपचार से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। परिजनों का कहना है कि इन रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच होने से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रिपोर्ट में गलती कैसे हुई, उसका उपचार प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ा और मरीज की मौत से उसका कोई संबंध था या नहीं।

एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग
परिवार ने सरकार से एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि यह मांग केवल आर्थिक क्षतिपूर्ति के तौर पर नहीं, बल्कि कथित लापरवाही की जवाबदेही तय करने और परिवार को न्याय दिलाने के उद्देश्य से की गई है।

अब जांच से तय होगी जिम्मेदारी
इस मामले ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के डेटा की शुद्धता, लैब रिपोर्टिंग, बारकोड सिस्टम और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। खासकर दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के रिकॉर्ड सिस्टम की विश्वसनीयता पर इस मामले के बाद चर्चा तेज हो सकती है।

अब सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि शासन मामले की स्वतंत्र जांच कराता है या नहीं और जांच में क्या सामने आता है। मरीज की रिपोर्ट में हुई गलती स्वीकार किए जाने के बावजूद, गलत रिपोर्ट और मृत्यु के बीच चिकित्सकीय संबंध था या नहीं, इसका फैसला विशेषज्ञ जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकेगा।

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