Supreme Court on Pellet Guns: पैलेट गन पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी! पूर्ण प्रतिबंध से किया इनकार, दिल्ली सरकार को घायलों के इलाज के निर्देश

Supreme Court on Pellet Guns: पैलेट गन पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी! पूर्ण प्रतिबंध से किया इनकार, दिल्ली सरकार को घायलों के इलाज के निर्देश

नई दिल्ली। CJP प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को बल प्रयोग करने का अधिकार प्राप्त है। साथ ही कोर्ट ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग पर भी सवाल उठाए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों के इलाज और घटना से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने जैसे पहलुओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।

दिल्ली सरकार को घायलों के इलाज के निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से घायल हुए लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर तैनात सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी जांच की जा सके।

पूर्ण प्रतिबंध की मांग पर कोर्ट ने जताए सवाल
याचिका में मांग की गई थी कि भीड़ नियंत्रण के दौरान धातु के छर्रों (मैटेलिक पैलेट) वाले हथियारों के इस्तेमाल पर देशभर में रोक लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि उपलब्ध दिशानिर्देशों के अनुसार कानून-व्यवस्था की असाधारण परिस्थितियों में पुलिस के पास कुछ वैधानिक अधिकार होते हैं। अदालत ने इस स्तर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग पर सहमति नहीं जताई।

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BPRD की एडवाइजरी का भी हुआ उल्लेख
सुनवाई के दौरान ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) की एडवाइजरी का भी उल्लेख किया गया। इसमें भीड़ नियंत्रण के दौरान बल प्रयोग से जुड़े दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया। अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर की दलीलों को भी सुना और मामले में उठाए गए विभिन्न संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर विचार किया।

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याचिका में क्या मांग की गई है?
पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद सहित याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि

  • मैटेलिक पैलेट वाले हथियारों के इस्तेमाल पर देशव्यापी रोक लगे।
  • भीड़ नियंत्रण के लिए कम नुकसान पहुंचाने वाले वैकल्पिक उपाय अपनाए जाएं।
  • बल प्रयोग से जुड़े स्पष्ट राष्ट्रीय मानक बनाए जाएं।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ऐसे हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों के मौलिक अधिकारों और अनुपातिक बल प्रयोग के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

मामला अभी विचाराधीन
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं और संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है। मामले की आगे की सुनवाई में विस्तृत कानूनी बहस होने की संभावना है।

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