महासमुंद नकल कांड में बड़ा एक्शन! हाईकोर्ट की सख्ती के बाद 5 शिक्षा कर्मियों पर चार्जशीट, विभागीय जांच शुरू
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सामने आए चर्चित सामूहिक नकल प्रकरण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों और लगातार निगरानी के बाद राज्य सरकार ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने हाईकोर्ट में दायर अपने व्यक्तिगत शपथपत्र (पर्सनल एफिडेविट) में बताया कि मामले की जांच के बाद चार शिक्षकों और एक भृत्य (चपरासी) सहित कुल पांच कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करते हुए चार्जशीट जारी कर दी गई है। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि सामूहिक नकल जैसे गंभीर मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं। इसी के जवाब में शिक्षा सचिव ने विस्तृत शपथपत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
पांच कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई
शपथपत्र के अनुसार, जांच में प्रथम दृष्टया भूमिका सामने आने पर लेक्चरर गंगा प्रसाद पटेल, अनिरुद्ध आलोक भोई, दिनेश कुमार दास, सहायक शिक्षक (एल.बी.) दुर्गा प्रसाद पटेल तथा भृत्य विजिया बुडेक के खिलाफ विभागीय चार्जशीट जारी की गई है। सभी आरोपियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
दोषी पाए जाने पर होगी कड़ी कार्रवाई
शिक्षा सचिव ने अपने शपथपत्र में स्पष्ट किया है कि विभाग इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है। यदि विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सेवा नियमों के अनुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोषियों को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने मांगी कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव अगली सुनवाई से पहले एक और व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करें। इसमें विभागीय जांच की प्रगति, आरोपियों के जवाब, जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत किया जाए। यदि अगली सुनवाई तक विभागीय जांच पूरी हो जाती है, तो अंतिम जांच रिपोर्ट और उस पर पारित आदेश भी न्यायालय के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
स्टिंग ऑपरेशन से खुला था मामला
यह पूरा मामला महासमुंद जिले के भंवरपुर परीक्षा केंद्र का है, जहां 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान कथित रूप से खुलेआम सामूहिक नकल कराए जाने का आरोप लगा था। छात्रा नीता ने परीक्षा केंद्र के अंदर हो रही कथित अनियमितताओं का स्टिंग ऑपरेशन किया और वीडियो सहित संबंधित साक्ष्य जुटाए। छात्रा ने पहले जिला स्तर पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन जब कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो उसने माध्यमिक शिक्षा मंडल के समक्ष लिखित शिकायत दी। वहां भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उसने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने स्वतः लिया गंभीर संज्ञान
याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे केवल एक व्यक्तिगत शिकायत नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना। अदालत ने इसे जनहित से जुड़ा विषय मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अब सभी की नजर विभागीय जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी है। आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।
