Bilaspur Education Scam: बिना मान्यता CBSE पैटर्न की पढ़ाई, अभिभावकों के विरोध के बाद जांच शुरू

Bilaspur Education Scam: बिना मान्यता CBSE पैटर्न की पढ़ाई, अभिभावकों के विरोध के बाद जांच शुरू

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां बिना मान्यता के CBSE पैटर्न पर पढ़ाई कराने का मामला उजागर हुआ है। अभिभावकों के विरोध और हंगामे के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है, जिसे सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, कुछ निजी स्कूलों ने एडमिशन के समय खुद को CBSE से संबद्ध बताकर छात्रों को दाखिला दिया और पूरे सत्र में CBSE कोर्स पढ़ाया। लेकिन सत्र के अंत में 5वीं और 8वीं कक्षा के छात्रों को छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर किया गया, जिससे अभिभावकों में भारी नाराजगी फैल गई।lyn4ob_1773891750

इस विवाद में ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और नारायण ई-टेक्नो स्कूल समेत कई संस्थानों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन स्कूलों में केवल 8वीं तक कक्षाएं संचालित हो रही हैं, जबकि CBSE से मान्यता प्राप्त करने के लिए 12वीं तक कक्षाओं का संचालन अनिवार्य होता है। ऐसे में इन स्कूलों को CBSE से मान्यता नहीं मिली है, बावजूद इसके CBSE पैटर्न पर पढ़ाई कराई जा रही थी।

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मामला तब और बढ़ गया जब छात्रों से वार्षिक परीक्षा भी CBSE पैटर्न पर ली गई, लेकिन राज्य सरकार के निर्णय के चलते उन्हें CG बोर्ड की परीक्षा देने के लिए कहा गया। इससे छात्रों और अभिभावकों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई।unzdr2_1773891798

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स्थिति से नाराज अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। विवाद बढ़ने पर शिक्षा विभाग हरकत में आया और जांच समिति का गठन किया गया।

गठित टीम में सहायक संचालक जे.के. शास्त्री, पी. दासरथी और तखतपुर के बीईओ को शामिल किया गया है। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।image-2_1773891957

यह मामला अभिभावकों के लिए एक अहम सीख भी है कि बच्चों के एडमिशन से पहले स्कूल की मान्यता की पूरी जांच जरूरी है। विशेषज्ञों की सलाह है कि अभिभावक संबंधित बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर स्कूल की संबद्धता जांचें, शिक्षा विभाग से पुष्टि करें और सभी दस्तावेजों की जानकारी लेने के बाद ही प्रवेश दिलाएं।

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