2549 करोड़ का टेंडर: बिछानी है 112 किमी पाइपलाइन, अनुभव 30 किमी का, फिर भी दरबार की मेहरबानी से काम पाने की जुगत

2549 करोड़ का टेंडर: बिछानी है 112 किमी पाइपलाइन, अनुभव 30 किमी का, फिर भी दरबार की मेहरबानी से काम पाने की जुगत

रायपुर। केंद्र सरकार की  गारंटी 2023' के घोषणा पत्र में शामिल और राज्य सरकार की  महत्वाकांक्षी  सिकासार-कोडार जलाशय लिंक पाइपलाइन योजना  अपनी निविदा प्रक्रिया को लेकर चर्चा में है। 112 किलोमीटर लंबी इस भूमिगत पाइपलाइन और मुख्य नहर निर्माण परियोजना के लिए 254986.22 लाख रुपये की ई-प्रोक्योरमेंट निविदा आमंत्रित की गई है। लेकिन जिस तरह से प्रक्रिया चल रही है, ऐसा लगता है कि तकनीकी अनुभव की कमी को 'दरबार' में चढ़ावे से पाटने का नया इंजीनियरिंग कौशल ईजाद कर लिया गया है।
योजना का स्वरूप और दायरा व्यापक है। सिकासार जलाशय के राइट बैंक में हेड रेगुलेटर बनाकर अंडर ग्राउंड पाइप लाइन तथा स्थल परिस्थिति अनुसार ओपन चैनल का निर्माण किया जाना है। इससे गरियाबंद जिले के मैनपुर व गरियाबंद विकासखंड में 5000 हेक्टेयर और छुरा व फिंगेश्वर विकासखंड में 1000 हेक्टेयर के लिए खरीफ में जल उपलब्ध होगा। साथ ही इसे महासमुंद के केशवा और कोडार जलाशय से जोड़ने की भी योजना है। भूमिगत पाइप लाइन के प्रावधान से निजी भूमि अधिग्रहण का रकबा कम होगा। इससे पानी के नुकसान में कमी आएगी और अधिक वेग के साथ जल प्रवाहित होगा। बीते 25 वर्षों में केशवा और कोडार जलाशय में मात्र 50 से 60 प्रतिशत ही जलभराव हुआ है। नए निर्माण से केशवा के 3486 हेक्टेयर और कोडार के 23472 हेक्टेयर डिजाइन रकबे को जल उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
यह पाइपलाइन योजना सरकार की रणनीतिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है। इसमें बड़े पाइपलाइन सिस्टम का निर्माण, टेस्टिंग, ट्रायल रन, कमीशनिंग के साथ पांच साल तक सफल संचालन और रखरखाव शामिल है। इसके पैमाने और तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए अनुबंध उन्हीं एजेंसियों को दिया जाना चाहिए जिनके पास समान आकार और मूल्य की बड़ी व्यास वाली जल संचरण पाइपलाइन परियोजनाओं का प्रमाणित अनुभव हो।
परन्तु, इस निविदा में हिस्सा लेने वाले कुछ निविदाकारों—जैसे एनसीसी, दिलीप बिल्डकॉन, ऋत्विक प्रोजेक्ट्स और ऑफशोर कंस्ट्रक्शन—के तकनीकी अनुभव पर गंभीर चिंताएं उभर रही हैं। यदि इनके बिड डॉक्यूमेंट्स की जांच की जाए, तो निर्धारित योग्यता नदारद मिलती है। इनमें से किसी के पास अधिकतम 1 मीटर व्यास वाली 30 से 40 किलोमीटर तक ही पाइप लाइन बिछाने का अनुभव है। बिड कैपेसिटी में अर्हता न रखने वाली ये कंपनियां नियमतः अपात्र ही मानी जानी चाहिए।
बावजूद इसके, नियमों को तोड़-मरोड़ कर अपात्र कंपनियों को पात्र बनाने की कुटरचना रची जा रही है। चर्चा है कि एन.सी.सी कंपनी द्वारा अपनी निविदा स्वीकृति के लिए करोड़ों का चढ़ावा दिया जा चुका है। इस निष्पादन के लिए लंबी दूरी की प्रेशराइज्ड वाटर ट्रांसमिशन पाइपलाइन की डिजाइन, हेवी पाइपलाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, विशेष उपकरणों की तैनाती और अनुभवी तकनीकी मैनपावर की आवश्यकता है।
संसाधनों की कमी या खराब प्रोजेक्ट प्लानिंग के कारण होने वाली कोई भी देरी सरकार के उद्देश्यों को प्रभावित करेगी। अब राज्य शासन के सामने यह संशय बना हुआ है कि अनुभवहीनों के भरोसे चल रही इस त्वरित प्राथमिकता वाली योजना का उद्घाटन क्या मोदी जी इसी कार्यकाल में कर पाएंगे?

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