रास्ते में ही खराब हुई एंबुलेंस, 2 घंटे तड़पती रही पहाड़ी कोरवा गर्भवती; मौत के बाद पहुंची गाड़ी, बीएमओ बोले- अस्पताल तो डेढ़ साल से बंद है

रास्ते में ही खराब हुई एंबुलेंस, 2 घंटे तड़पती रही पहाड़ी कोरवा गर्भवती; मौत के बाद पहुंची गाड़ी, बीएमओ बोले- अस्पताल तो डेढ़ साल से बंद है

जशपुर।जिले के सुदूरवर्ती महनई गांव से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक पहाड़ी कोरवा गर्भवती महिला की मौत हो गई। मौत का कारण एंबुलेंस का समय से नहीं पहुंचना रहा। एंबुलेंस बगीचा से निकली जरूर थी, लेकिन रास्ते में ही खराब हो गई। एंबुलेंस बनकर जब तक महिला के घर पहुंचती, तब तक उसकी जान जा चुकी थी। मामले में बगीचा बीएमओ ने बताया है कि गांव में सरकारी अस्पताल है, लेकिन डॉक्टर नहीं होने के चलते वह डेढ़ साल से बंद पड़ा है।

जानें दर्द शुरू होने से पहले से मौत तक का घटनाक्रम

मृतका महनई गांव के गासेबन बस्ती की रहने वाली थी। परिजनों के मुताबिक घटना शनिवार की है। शनिवार दोपहर तकरीबन 3 बजे गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। जब दर्द बढ़ने लगा, तो तकरीबन 4 बजे मृतका के परिजनों ने बगीचा फोन लगाया और एंबुलेंस की मांग की। फोन करने के बाद बगीचा से एंबुलेंस निकली जरूर, लेकिन गासेबन बस्ती पहुंचने से पहले ही रास्ते में खराब हो गई। गाड़ी को वहीं ठीक किया गया। लेकिन इस काम में काफी समय लग गया। एंबुलेंस बनकर जब तक मृतका के घर पहुंच पाती, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्रसव पीड़ा के कारण महिला की मौत हो चुकी थी।

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रिश्तेदार ने पूछा लेट आने का कारण

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मृतका के रिश्तेदार जीतन राम पहाड़िया ने बताया कि एंबुलेंस बुलाने के लिए 4 बजे फोन किया गया था। लेकिन गाड़ी पूरे 2 घंटे बाद उनके घर पहुंची। जीतन राम ने जब गाड़ी वालों से लेट आने का कारण पूछा, तो एंबुलेंस वालों ने बताया कि रास्ते में उनका एंबुलेंस ही खराब हो गया था। गाड़ी के रास्ते में खराब होने के कारण ही उन्हें बगीचा से गासेबन महनई पहुंचने में 2 घंटे लग गए।

बीएमओ का जवाब- निजी कंपनी चलाती है एंबुलेंस

इस संबंध में जब बगीचा के बीएमओ से दूरभाष पर बात की गई, तो उनका जवाब बिल्कुल सीधा था। उन्होंने बताया कि 102 और 108 एंबुलेंस का कंट्रोल रायपुर से होता है। इसे संचालित करने का काम एक निजी कंपनी करती है। इसलिए एंबुलेंस की देरी या उसके खराब होने के लिए स्वास्थ्य विभाग जवाबदार नहीं होता।

गांव में अस्पताल है, पर डेढ़ साल से लगा है ताला

बीएमओ से बातचीत में एक चौंकाने वाली बात सामने आई। बीएमओ ने बताया कि महनई गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। लेकिन वहां डॉक्टर और कर्मचारी नहीं हैं। डॉक्टर और कर्मचारियों के नहीं होने के चलते यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले डेढ़ साल से बंद पड़ा है। हालांकि, बीएमओ ने यह भी बताया कि बहुत जल्द प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पूर्व की तरह संचालित होने लगेगा।

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