11 हजार करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा 'हर घर जल' का सपना! CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की कई बड़ी खामियां उजागर

11 हजार करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा 'हर घर जल' का सपना! CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की कई बड़ी खामियां उजागर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण घरों तक नल से पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित जल जीवन मिशन की प्रगति पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। विधानसभा में पेश प्रदर्शन लेखा परीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 तक इस योजना पर 11,034.26 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य केवल 78 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक ही क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन पहुंचा सका। इसी वजह से राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की रैंकिंग 23वें स्थान पर रही।

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2019 में मिशन शुरू होने के समय राज्य के केवल 3.20 लाख ग्रामीण परिवारों (करीब 6 प्रतिशत) के पास ही कार्यशील नल कनेक्शन था। अगले लगभग पांच वर्षों में यह संख्या बढ़कर 38.97 लाख परिवारों (78 प्रतिशत) तक पहुंची, लेकिन CAG का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों और तय लक्ष्यों की तुलना में यह प्रगति संतोषजनक नहीं मानी जा सकती। रिपोर्ट में योजना निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था में कई कमियों का उल्लेख किया गया है।

हजारों योजनाएं स्वीकृत, लेकिन पूरी हुईं सिर्फ 172
लेखा परीक्षा में सामने आया कि जल जीवन मिशन के तहत 29,153 एकल ग्राम जलापूर्ति योजनाएं स्वीकृत की गई थीं, लेकिन मार्च 2024 तक इनमें से केवल 172 योजनाएं ही पूरी हो सकीं। इनमें भी महज 32 योजनाओं का संचालन और रखरखाव ग्राम पंचायतों या स्थानीय सामुदायिक संस्थाओं को सौंपा गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई स्थानों पर पेयजल व्यवस्था पूरी तरह तैयार नहीं होने के बावजूद गांवों को 'हर घर जल' घोषित कर दिया गया।

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कोई जिला नहीं पहुंच सका 100 फीसदी लक्ष्य तक
CAG ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि राज्य का कोई भी जिला या विकासखंड सभी ग्रामीण परिवारों तक शत-प्रतिशत नल कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल नहीं कर सका। धमतरी जिले में सबसे अधिक 98 प्रतिशत कवरेज दर्ज की गई, जबकि बलौदाबाजार में यह 76 प्रतिशत रही। वहीं, राज्य के 15 जिलों में नल कनेक्शन की पहुंच 56 से 74 प्रतिशत के बीच ही सीमित रही।

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि योजना तैयार करने की प्रक्रिया में निर्धारित 'बॉटम-अप प्लानिंग' का पालन नहीं किया गया। कई जिलों में ग्राम स्तर की कार्ययोजनाएं तैयार किए बिना जिला योजनाएं बनाई गईं और राज्य स्तरीय कार्ययोजना भी समय पर तैयार नहीं हो सकी। इसके चलते शुरुआती दो वर्षों में परियोजनाओं में देरी हुई और राज्य लगभग 6,480 करोड़ रुपये की संभावित केंद्रीय एवं राज्य हिस्सेदारी का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाया।

पानी की गुणवत्ता और तकनीकी व्यवस्था पर भी सवाल
लेखा परीक्षा में जल गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था को भी कमजोर बताया गया है। राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल चार प्रयोगशालाएं ही सभी निर्धारित मानकों की जांच करने में सक्षम थीं, जबकि बड़ी संख्या में लैब आवश्यक मान्यता (NABL Accreditation) से भी वंचित थीं। इसके अलावा कई सौर आधारित जलापूर्ति योजनाओं में क्षमता से अधिक कनेक्शन दिए जाने के कारण करीब 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुरूप पेयजल उपलब्ध नहीं हो सका।

CAG ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि यदि योजना निर्माण, वित्तीय अनुशासन, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी प्रणाली में समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो हर ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और नियमित पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।

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