भाजपा V/S कांग्रेसः दोनों दलों में 50 से 60 प्रतिशत टिकट काटने की तैयारी

भाजपा V/S कांग्रेसः दोनों दलों में 50 से 60 प्रतिशत टिकट काटने की तैयारी

भाजपा V/S कांग्रेसः दोनों दलों में 50 से 60 प्रतिशत टिकट काटने की तैयारी भोपाल : मध्यप्रदेश में चल रहे सत्ता के संघर्ष में बाजी मारने के लिये सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ही इस बार विधानसभा चुनाव में कतई कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती हैं। इसीलिये दोनों ही पार्टियां अपने दागी […]

भाजपा V/S कांग्रेसः दोनों दलों में 50 से 60 प्रतिशत टिकट काटने की तैयारी


भोपाल : मध्यप्रदेश में चल रहे सत्ता के संघर्ष में बाजी मारने के लिये सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ही इस बार विधानसभा चुनाव में कतई कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती हैं। इसीलिये दोनों ही पार्टियां अपने दागी नेताओं या वर्तमान विधायकों में से 50 से 60 प्रतिशत के टिकट काट सकती है। टिकट कटने की संभावना से दोनों ही दलों में सुगबुगाहट है और यदि ऐसा हो गया तो इस बार विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक बागी उम्मीदवार भी मैदान में आ सकते हैं। इसीलिये कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के विधायकों से लेकर चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं ने अन्य दलों से अपने रिश्ते बेहतर बनाने पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया हैं।
राज्य के विधानसभा चुनाव नवंबर 2023 में होने हैं, इसी कारण राज्य में राजनैतिक सरगर्मियां भी जोरों पर पहुंच गई हैं। कांग्रेस तो अपनी पहली सूची अगस्त माह के अंत में ही जारी करने की तैयारी में लगी है, ताकि प्रत्याशियों को जनता के बीच जाने का ज्यादा समय मिल सकें। इस सूची में लगभग 230 में से 140 प्रत्याशी घोषित होने की संभावना हैं। वहीं ठीक इसके उलट अभी भाजपा का टिकट के लिये संभावित नामों का कोई प्लान ही नहीं हुआ हैं। केवल इतना जरूर हैं कि भाजपा के बिग बोस केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह व अन्य नेता राज्य में चुनावी गरमाहट जरूर ले आये हैं। हालांकि प्रदेश में भाजपा से पहले कांग्रेस ने ताबड़तोड़ कार्यक्रम व बड़े नेताओं को बुलाकर भारी पड़ने की कोशिश की थी, लेकिन अब भजपा मेें कांग्रेस की तर्ज पर दिग्गजों के कार्यक्रमों व चुनावी घोषणाओं पर ध्यान दे रही हैं।
50 से 60 प्रतिशत नये चेहरे
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुकाबले राज्य विधानसभा में वर्तमान विधायकों व मंत्रियों की परफोरमेंस रिपोर्ट के आधार पर 50 से 60 प्रतिशत तक प्रत्याशी बदले जा सकते हैं। इसके लिये पार्टी और संघ से जुड़ी सर्वे कंपनियां वर्तमान विधायक या नेता के मुकाबले नये चेहरे तलाश रही है।
यहीं स्थिति कांग्रेस में है। कांग्रेस ने भी लगभग 50 प्रतिशत नये चेहरे संभावित तौर पर तलाशे हैं। इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ भाजपा से आगे हैं। उन्होंने अप्रैल-मई में ही अपनी सर्वे टीमों को लगाकर हर विधानसभा क्षेत्र की रिपोर्ट, संभावित प्रत्याशी, वर्तमान विधायकों व अन्य समीकरणों की जानकारी एकत्र कर ली हैं। जिसके आधार पर वह सर्वे रिपोर्टों से अपने आपको कान्फीडेंस में मान रहे हैं।
भाजपा का गुजरात फार्मूले पर ज्यादा ध्यान
भाजपा विधानसभा चुनाव में गुजरात फार्मूले पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। इसके लिये गुजरात व यूपी के भाजपा नेता मध्यप्रदेश में हर विधानसभा क्षेत्र में लगा दिये गये हैं। पिछले दिनों इन दोनों राज्यों के संघ से जुड़े लोग हर विधानसभा क्षेत्र व वार्ड में संपर्क कर चुके हैं और राज्य में भी प्रधानमंत्री मोदी के नाम से सहयोग की अपीलें कर रहे हैं। वहीं यूपी के भाजपाई एमपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार के कामकाज की तारीफ कर सहयोग मांग चुके हैं।
भाजपा ढीली नहीं पड़ेगी
शुरूआत में कांग्रेस को लग रहा था कि भाजपा सरकार पर हमले क रवह आक्रामक हो जायेगी। लेकिन भाजपा के कोर ग्रुप के सदस्यों ने स्थिति सम्हाल ली हैं। स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से लेकर भाजपा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, केन्द्रीय मंत्रीद्वय नरेन्द्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रहलाद पटेल, प्रदेश अध्यक्ष व्हीडी शर्मा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने राज्य की भाजपा की स्थिति बेहतर रखने के लिये सतत कार्यकर्ताओं से संपर्क, दौरे बढ़ा दिये हैं।
कुल मिलाकर भाजपा राज्य में पांचवीं बार सत्ता वापसी के लिये कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती तो कांग्रेस कमलनाथ की जी तोड मेहनत के बदौलत और सरकार के साथ हुई धोखाधड़ी पर सहानुभूति में सरकार की वापसी चाहती हैं।

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