रक्सौल बॉर्डर पर मानव तस्करी का बड़ा भंडाफोड़: कोडवर्ड, व्हाट्सएप चैट और करोड़ों रुपये का लक्ष्य

add-a-heading-68 रक्सौल (बिहार) – भारत‑नेपाल सीमा के रक्सौल बॉर्डर पर एक अत्यंत खतरनाक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफ़ाश हुआ है, जिसका उद्देश्य मासूम लड़कियों को वेश्यावृत्ति, अवैध अंग व्यापार और अन्य अपराधों में धकेलकर सालाना ₹400 करोड़ तक की कमाई करना था। यह खुलासा तस्करों के लीक हुए व्हाट्सएप चैट और सुरक्षा एजेंसियों की जांच से सामने आया है।

खुफ़िया सूचना और चैट स्क्रीनशॉट यह दर्शाते हैं कि गिरोह कितना पेशेवर और क्रूर तरीके से अपने नेटवर्क को संचालित कर रहा था। एक चैट में तस्कर लिखते हैं — “400 करोड़ भी चाहिए और वीडियो भी नहीं भेज रहा…” — जिससे पता चलता है कि बड़े पैमाने पर मुनाफ़ा कमाने की योजना थी।

कैसे फँसाते हैं मासूम लड़कियों को?

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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह गिरोह सोशल मीडिया और प्रेम‑झांसे का इस्तेमाल कर लड़कियों को फँसाता है। पहले उन्हें अच्छी नौकरी या शादी का झांसा दिया जाता है, फिर अश्लील वीडियो बना कर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है, और अंत में उन्हें सीमा पार या बड़े शहरों में ले जाया जाता है।

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जाल में फँसे एजेंट जब किसी लड़की को गिरोह तक पहुँचाते हैं, तो उसके बारे में विस्तृत बायोडाटा तैयार किया जाता है — नाम, उम्र, वजन‑लंबाई से लेकर शरीर पर किसी निशान की जानकारी तक — तथा इंच‑टेप से शरीर के माप तक भेजे जाते थे। एजेंट को इसके एवज़ में ₹50,000 से ₹1,00,000 तक की रकम दी जाती थी।

कोडवर्ड का इस्तेमाल

गिरोह पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अलग‑अलग शहरों के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल करता था। जैसे कि दिल्ली के लिए “मामी” , मुंबई के लिए “मौसी” ,हैदराबाद के लिए “बुआ”, लुधियाना के लिए “दीदी” इस तरह नाम रिश्तों के आधार पर रखकर वे अपने नेटवर्क को छिपाने की कोशिश करते थे।

भारत‑नेपाल सीमा पर गंभीर आंकड़े

हाल के महीनों में बिहार‑नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों से लड़कियों के लगातार गायब होने की घटनाएँ चिंताजनक रूप से बढ़ी हैं। बताया गया है कि पिछले लगभग 6 महीनों में 100 से अधिक लड़कियाँ लापता हो चुकी हैं, जिससे यह मामला राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है।

मानवाधिकार संगठनों और अधिवक्ताओं ने इस समस्या को उच्चस्तरीय जांच के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुँचाया है। आरोप है कि कई लड़कियों को न सिर्फ देह व्यापार में धकेला जा रहा है, बल्कि अवैध अंग प्रत्यारोपण और अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी इसका उपयोग हो रहा है।

पुलिस और एनजीओ की भूमिका

स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार कार्रवाई कर रही हैं। स्वच्छ रक्सौल जैसे एनजीओ के कार्यकर्ता भी इस मुद्दे से जूझ रहे हैं और अब तक सैकड़ों लड़कियों को तस्करों के चंगुल से बचा चुके हैं। वहीं पुलिस भी सक्रिय रेस्क्यू ऑपरेशन्स चला रही है और तस्करी के नेटवर्क की तह तक पहुँचने की कोशिश कर रही है

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