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बिलासपुर भाजपा में अपनों ने ही बिगाड़ा अपनों का खेल, दिल्ली से फोन घनघनाया और रुक गया कार्यकम....
बिलासपुर। शहर की राजनीति में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। सोमवार को नगर निगम के सकरी में होने वाला 50 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन कार्यक्रम ऐन मौके पर टल गया। इस कार्यक्रम के स्थगित होने के पीछे कोई तकनीकी कारण नहीं बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर मची भीषण खींचतान को बड़ा कारण माना जा रहा है। दरअसल कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र से केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू और शहर विधायक अमर अग्रवाल का नाम ही गायब था। जैसे ही यह खबर राजधानी से होते हुए दिल्ली तक पहुंची तो वहां से आए एक फोन ने हड़कंप मचा दिया। आनन-फानन में पूरे आयोजन को ही रोक दिया गया। सकरी में पंडाल और सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं और समर्थक राह देखती रह गए...
विपक्ष की क्या जरूरत जब घर में ही दुश्मन हों
बिलासपुर भाजपा में चल रही यह गुटबाजी अब सड़कों पर नजर आने लगी है। चर्चा है कि भाजपा को अब किसी विपक्षी दल की जरूरत नहीं है क्योंकि पार्टी के भीतर ही नेता एक-दूसरे की जड़ें काटने में लगे हैं। कुछ दिन पहले राज्य युवा महोत्सव में भी शहर विधायक अमर अग्रवाल को बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली थी जिसे लेकर काफी बवाल मचा था। अब सकरी के कार्यक्रम के कार्ड से उनका और केंद्रीय मंत्री का नाम गायब होना यह बताता है कि शहर में वर्चस्व की जंग तेज हो गई है।
नदी पार वाले खनिज कारोबारी नेता के पाला बदलने और मस्तूरी को किनारे करने की चर्चा
सियासी गलियारों में खबर गरम है कि शहर के एक बड़े खनिज बिजनेसमैन जो नदी पार इलाके से कारोबार चलाते हैं उन्होंने अपना पाला बदलने के संकेत दे दिए हैं। वे अब पड़ोसी जिले के एक ताकतवर पावर सेंटर के संपर्क में बताए जा रहे हैं। वहीं जिले की मस्तूरी विधानसभा को भी लगातार किनारे किए जाने से वहां के समर्थकों में भारी नाराजगी है। ऐसा लग रहा है कि बिलासपुर की राजनीति में अब केवल एक ही नेता राज करना चाहता है और इसके लिए पुराने और दिग्गज नेताओं को धीरे-धीरे मुख्यधारा से बाहर किया जा रहा है।
कांग्रेस को मिला बैठे-बिठाए मुद्दा, आरपी सिंह ने घेरा
भाजपा की इस अंदरूनी लड़ाई को देख कांग्रेस भी हमलावर हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस पूरे मामले को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए भाजपा पर तंज कसा है। आरपी सिंह ने लिखा कि भाजपा में अब गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है और इन्हें अब किसी विपक्ष की जरूरत नहीं है। भाजपा के लोग आपस में ही लड़ने के लिए काफी हैं।
निगम के नेता भी दूसरे पाले के संपर्क में
नगर निगम के भीतर भी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। खबर है कि निगम के कई रसूखदार नेता अब एक खास पावर कनेक्शन के संपर्क में हैं। जिले की राजनीतिक फिजा पूरी तरह बदल चुकी है जहां अपनों को ही नीचा दिखाने का खेल चल रहा है। राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि पावर को देखते हुए अब शहर के नेता धीरे-धीरे अपना प्लग पावर की ओर बढ़ा रहे हैं।
बताया जा रहा है की करंट की कमी से बिलासपुर की राजनीति पावरलेस होती जा रही है यही कारण है लोकगीत धीरे-धीरे अपना रुख भी बदल रहे हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
