आसाराम को हाईकोर्ट से बड़ा झटका: उम्रकैद बरकरार, जोधपुर कोर्ट ने कहा- तुरंत करें सरेंडर

आसाराम को हाईकोर्ट से बड़ा झटका: उम्रकैद बरकरार, जोधपुर कोर्ट ने कहा- तुरंत करें सरेंडर

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में स्वयंभू संत आसाराम को बड़ा झटका देते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की खंडपीठ ने साफ किया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा में किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी। हालांकि अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोप से उन्हें राहत दी, लेकिन बाकी गंभीर धाराओं में दोषसिद्धि कायम रखते हुए तत्काल सरेंडर करने के निर्देश जारी किए। आसाराम चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत पर बाहर हैं।

न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की पीठ ने लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सामूहिक दुष्कर्म की धारा पूरी तरह सिद्ध नहीं होती, लेकिन पीड़िता के आरोप और अन्य सबूत इतने मजबूत हैं कि मुख्य अपराधों में सजा को रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि मामले में अभियोजन पक्ष पर्याप्त प्रमाण पेश करने में सफल रहा है।

यह मामला वर्ष 2013 का है, जब एक नाबालिग लड़की ने जोधपुर के महिला थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि आश्रम में उसके साथ दुष्कर्म किया गया। शिकायत के बाद देशभर में सनसनी फैल गई थी और 31 अगस्त 2013 को आसाराम को इंदौर से गिरफ्तार किया गया था। लंबी जांच और सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने अप्रैल 2018 में उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आसाराम और सह-आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

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हाईकोर्ट ने इस मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद्र को राहत देते हुए बरी कर दिया, लेकिन आसाराम की मुख्य सजा को बरकरार रखा। पीड़ित पक्ष के वकील ने फैसले को न्याय की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रभावशाली व्यक्ति होने से कानून से बचा नहीं जा सकता। वहीं बचाव पक्ष अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर सकता है।

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गौरतलब है कि आसाराम पहले से ही गुजरात के गांधीनगर आश्रम से जुड़े एक अन्य दुष्कर्म मामले में भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। बीते वर्षों में उन्हें स्वास्थ्य कारणों से अंतरिम जमानत मिली थी, लेकिन अदालतें लगातार उनकी स्थायी राहत की मांग खारिज करती रही हैं। हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद अब एक बार फिर आसाराम की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं और उन्हें दोबारा जेल लौटना पड़ सकता है।

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