India on High Alert: मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत सतर्क, सेना प्रमुखों के साथ हुई हाई-लेवल मीटिंग
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। इसी कड़ी में राजनाथ सिंह की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश की सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
इस अहम बैठक में जनरल अनिल चौहान (सीडीएस), एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और समीर कामत समेत तीनों सेनाओं और रक्षा संगठनों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सीमाओं की निगरानी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने की रणनीति पर चर्चा की गई।
इससे पहले 22 मार्च को नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में भी ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति को लेकर समीक्षा की गई थी, जो मौजूदा वैश्विक संकट के बीच भारत के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब और गंभीर होता जा रहा है, जिसका सीधा असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाला तेल और गैस का व्यापार प्रभावित हो रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
सरकार के स्तर पर भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है। संसद में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह संकट न केवल आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से, बल्कि मानवीय स्तर पर भी बड़ी चुनौती बन सकता है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है, ऐसे में हालात पर लगातार नजर रखना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए भारत “प्रोएक्टिव डिफेंस स्ट्रेटेजी” पर काम कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित संकट का समय रहते जवाब दिया जा सके।
