Gold-Silver Crash 2026: सोना 24% और चांदी 40% तक टूटी, बाजार में क्यों मचा हड़कंप?

Gold-Silver Crash 2026: सोना 24% और चांदी 40% तक टूटी, बाजार में क्यों मचा हड़कंप?

नई दिल्ली। मार्च 2026 में सोना और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने वैश्विक बाजार को हिला दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, दोनों की कीमतों में 20% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ये कीमती धातुएं आधिकारिक तौर पर ‘बेयर मार्केट’ में पहुंच गई हैं। विशेषज्ञ इसे पिछले 45 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट बता रहे हैं, जो 1980 के बाद पहली बार देखने को मिली है।

मार्च महीने में जहां सोने की कीमत 20% से अधिक गिरी है, वहीं चांदी में करीब 33% की गिरावट दर्ज की गई। हालिया उच्च स्तर से तुलना करें तो सोना लगभग 24% और चांदी 40% से ज्यादा टूट चुकी है। इतनी तेज गिरावट ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक बॉन्ड मार्केट की बढ़ती आकर्षण क्षमता को माना जा रहा है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोने से निकलकर बॉन्ड्स की ओर रुख करते हैं। फिलहाल अमेरिका समेत कई देशों में सरकारी बॉन्ड यील्ड्स ऊंचे स्तर पर हैं, जिससे निवेशकों को बेहतर और सुरक्षित रिटर्न मिल रहा है।

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फेडरल रिजर्व के चेयर जेरोम पॉवेल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि महंगाई पर नियंत्रण तक ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है। इसका सीधा असर गोल्ड-डिमांड पर पड़ा है। दूसरी ओर, तेल और गैस की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को और बढ़ाया है, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए मौद्रिक नीति में ढील देना मुश्किल हो गया है। इस ‘डबल प्रेशर’ के कारण सोना-चांदी पर दबाव और बढ़ गया है।

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इसके अलावा, शेयर बाजार में आई गिरावट भी इस क्रैश का बड़ा कारण बनी। कई निवेशकों को मार्जिन कॉल के चलते अपने गोल्ड-होल्डिंग्स बेचने पड़े, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतें और नीचे चली गईं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई केंद्रीय बैंक भी फिलहाल सोना खरीदने की बजाय ऊर्जा संसाधनों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, सोने के लिए 4100 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो कीमतें 3800 डॉलर तक जा सकती हैं। वहीं चांदी के लिए 57 और 54 डॉलर के स्तर अहम माने जा रहे हैं। हालांकि, मौजूदा स्थिति ‘ओवरसोल्ड’ ज़ोन में है, जिससे अल्पकालिक उछाल की संभावना भी जताई जा रही है।

विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि घबराकर बिकवाली से बचें। यह गिरावट एक ‘करेक्शन फेज’ हो सकता है, न कि लंबी अवधि की मंदी। लंबी अवधि के निवेशक इस गिरावट को चरणबद्ध निवेश के अवसर के रूप में देख सकते हैं।

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